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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: खुद की सभापति हुई ट्रैप तो कांग्रेस ने साधा मौन, भाजपा भी रही चुप

कांग्रेस की ओर से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का बखान कई बार किया जाता रहा है, लेकिन अलवर में खुद कांग्रेस की सभापति बीना गुप्ता व उनके पुत्र पिछले दिनों 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए तो पार्टी के किसी मंत्री, पदाधिकारी एवं नेता की प्रतिक्रिया तक नहीं आई।

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अलवर

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Prem Pathak

Nov 29, 2021

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: खुद की सभापति हुई ट्रैप तो कांग्रेस ने साधा मौन, भाजपा भी रही चुप

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: खुद की सभापति हुई ट्रैप तो कांग्रेस ने साधा मौन, भाजपा भी रही चुप

अलवर. कांग्रेस की ओर से भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का बखान कई बार किया जाता रहा है, लेकिन अलवर में खुद कांग्रेस की सभापति बीना गुप्ता व उनके पुत्र पिछले दिनों 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए तो पार्टी के किसी मंत्री, पदाधिकारी एवं नेता की प्रतिक्रिया तक नहीं आई। भाजपा नेता भी इस मुद्दे पर अभी तक मौन साधे हुए हैं और सभापति के निलम्बन को लेकर कोई मांग तक नहीं की गई।

प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के एक दिन बाद अलवर में नगर परिषद सभापति बीना गुप्ता व उनके पुत्र निवास पर 80 हजार की रिश्वत लेते ट्रैप हुए थे। बाद में एसीबी ने दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया। नगर परिषद सभापति गुप्ता के ट्रैप हुए और उन्हें जेल गए कई दिन बीत गए, लेकिन कांग्रेस के किसी नेता अब तक इस घटना को लेकर न तो कोई बयान दिया है और न ही उनके खिलाफ पार्टी अभी तक कोई कार्रवाई कर पाई है। यह स्थिति तो तब है जब स्वयं मुख्यमंत्री अपनी सरकार की नीति भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस बता चुके हैं। वहीं पार्टी के अन्य नेता भी समय- समय पर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की चर्चा करते रहे हैं।

खुलकर कोई नेता व पदाधिकारी नहीं बोल रहे

सभापति के ट्रैप मामले को लेकर कांग्रेस में अंदरखाने हलचल मची है, लेकिन खुलकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं नगर परिषद सभापति पद को लेकर कांग्रेस की आगामी रणनीति पर भी कोई पार्टी नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। जबकि अलवर में कांग्रेस नगर परिषद सभापति चुनाव में मुश्किल से अपना बोर्ड बनवा पाने में सफल रही थी। पार्षदों की संख्या के लिहाज से नगर परिषद में भाजपा कांग्रेस से भारी दिखाई पड़ती है, फिर भी कांग्रेस इतनी बड़ी घटना को लेकर अभी तक मौन साधे हुए है।

अगले सभापति के बारे में नहीं कर पाई निर्णय
नगर परिषद सभापति बीना गुप्ता के रिश्वत लेते पकड़े जाने एवं जेल में कई दिन बीतने के बाद भी कांग्रेस अब तक उनके स्थान पर नियुक्त किए जाने वाले पार्षद या हाई ब्रीड पद्धति से चयनित व्यक्ति पर निर्णय नहीं कर सकी है। यही कारण है कि कांग्रेस खेमे के पार्षदों में खींचतान बढ़ रही है। कांग्रेस खेमे के पार्षद अब स्वयं के स्तर पर ही सभापति की कुर्सी हथियाने की रणनीति बनाने में जुटे हैं। कांग्रेस के पार्षद अलग- अलग खेमे में बंटकर अपने पक्ष में ज्यादा पार्षदों का समर्थन जुटाने एवं दिखाने के लिए बैठकों का आयोजन कर रहे हैं। पाटी के छुटभैये नेता पार्षदों की खेमेबाजी को हवा देने में जुटे हैं, वहीं कोई भी बड़ा नेता, पदाधिकारी एवं मंत्री पार्षदों की खेमेबाजी पर रोक लगाने के लिए आगे नहीं आया है।

उप सभापति की अयोग्यता के पेच से भाजपा की चुप्पी

नगर परिषद में सभापति बीना गुप्ता की ट्रैप कार्रवाई एवं उनके जेल जाने के बाद निलम्बन की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस की तरह भाजपा ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। भाजपा के किसी नेता, पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि का इस मामले को लेकर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई। सूत्रों के अनुसार नगर परिषद उपसभापति घनश्याम गुर्जर के खिलाफ अलवर एसडीएम की जांच में उन्हें दोषी ठहराए जाने से उन पर अयोग्यता की तलवार लटकी है। इस कारण भाजपा ने भी सभापति मामले में फिलहाल चुप रहना ही बेहतर समझा है, जबकि जयपुर में हुए मामले में भाजपा ने खूब शोर मचाया था।