
अलवर के बांध आखिर क्यूं नहीं भरते, जानिए क्या हैं कारण
अलवर. पेयजल एवं सिंचाई की समस्या से जूझ रहे अलवर जिले के बांध ही बारिश के दौरान लबालब हो जाएं तो ईस्टर्न कैनाल या चम्बल से पानी लाने जैसे प्रोजेक्ट पर सरकार को करोड़ों रुपए खर्च नहीं करने पड़े।
अलवर जिले में अकेले सिंचाई विभाग के 21 बांध हैं। इनमें ज्यादातर की भराव क्षमता 15 फीट से ज्यादा है। लेकिन ये बांध बारिश के दौरान भरते क्यूं नहीं है। यही अलवर की पेयजल समस्या का बड़ा कारण है।
अलवर जिले में सिंचाई विभाग के जयसमंद, सिलीसेढ़, हरसोरा, बावरिया, मंगलसर, मानसरोवर ,जय सागर, जैतपुर, सिलीबेरी, धमरेड़, देवती, बीगोता, लक्ष्मणगढ़, तुसारी, झिरोली, खानपुर, बघेरी खुर्द, निम्बाहेडी, सारन खुर्द एवं समर सरोवर बांघ हैं। यदि इन बांधों में साल भर पानी रहे तो आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर ऊंचा हो सकता है। इससे सूखे कुओं व ट्यूबवैलों में पानी की आवक होने से लोगों को आसानी से पीने एवं सिंचाई के लिए पानी मिल सकता है।
तीन दशक में एक भी बांध लगातार लबालब नहीं
अलवर जिले में सिंचाई विभाग के 21 बांधों में एक भी ऐसा नहीं, जो कि गत तीन दशक से लगातार भराव क्षमता तक भरा हो। इनमें 8 बांध तो बीते तीन दशक में कभी भी भराव क्षमता को नहीं छू सके। वहीं सिलीसेढ़ ही ऐसा बांध है जो इस दौरान 9 बार लबालब हो सका। इसके अलावा तीन बांध एक ही बार पूरा भर सके।
2013 के बाद ज्यादातर बांधों में पानी की आवक रूकी
जिले के अधिकतर बांधों में 2013 से पूर्व पानी की आवक हुई, लेकिन बाद में ज्यादातर बांध सूखे रहने लगे। बांधों में पानी की आवक रुकने का कारण कम वर्षा के साथ ही बांधों की पानी की आवक वाले रास्तों एवं कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण होना है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जगह- जगह बने एनीकट भी बांधों में पानी की आवक रोकने का कारण बने हैँ।
जिला कलक्टर ने बांधों के खाली रहने के कारण ढूंढने को कहा
जिला कलक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी ने जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियन्ता को विभाग के अधीन सभी 22 बांधों का विस्तृत रिकॉर्ड मय वीडियोग्राफी करवाकर तैयार कर अधिकतम एक माह में देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिला परिषद को पंचायतीराज विभाग के अधीन सभी 107 बांधों का रख-रखाव व अतिक्रमण मुक्त कराने का कार्य कराने के निर्देश दिए हैं।
Published on:
20 Nov 2022 12:14 am
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