
पहले तरसते थे बिजली को, अब खुद निगम को बेच रहे किसान
अलवर. किसानों की छोटी सी सोच ने बिजली के परिदृश्य को ही बदल दिया है। अब किसान खेत व मकान पर बिजली सप्लाई के लिए तरसने के बजाय खुद बिजली उत्पादक बन निगम को हर दिन बिजली बेच रहा है। अलवर जिले में अब तक पांच स्थानों पर किसानों ने सौर ऊर्जा से करीब 9 मेगावाट के बिजली उत्पादन संयंत्र लगाकर अन्य किसानों को भी राह दिखाई है।
बिजली संकट से छुटकारा पाने के लिए लोगों के समक्ष अब सौर ऊर्जा बड़े विकल्प के रूप में उभर रही है। शहरी क्षेत्रों के अलावा गांवों में भी अब किसान अपनी जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर न केवल खुद बिजली आवश्यकता की पूर्ति कर रहा है, बल्कि बची बिजली को विद्युत निगम को बेच मोटी रकम भी कमा रहा है।
सौर ऊर्जा के पांच संयंत्र लगे, कई तैयारी में
अलवर जिले में पांच उपखंड क्षेत्रों में किसानों ने सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। इनमें उपखंड मुंडावर के पेहल गांव में 2 मेगावाट, सोडावास के सांहोली गांव में 2 मेगावाट, बानसूर के भूपसेड़ा में एक मेगावाट, बानसूर के ही हाजीपुर में 2 मेगावाट तथा मांढण के मंगलपुर में 2 मेगावाट बिजली उत्पादन संयंत्र लगाया गया है। ये सभी बिजली उत्पादन संयंत्र प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत लगाए गए हैं।
सौर ऊर्जा से खेतों पर चल रहे पंप सेट
सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के साथ ही अलवर जिले में 884 पंप सेट भी विभिन्न गांवों में सौर ऊर्जा से चल रहे हैं। ये सभी पंप सेट 7.5 एचपी क्षमता तक के हैं। जिले में वर्ष 2019-20 में 519 पंप सेट, 2020-21 में 144 पंप सेट, 2021-22 में 73 एवं 2022- 23 में 148 पंप सेट लग चुके हैं। वहीं कुसुम कम्पोनेंट सी में राजगढ़ उपखंड के टहला में पालपुर 11 केवी फीडर पर 64 कृषि उपभोक्ताओं से सहमति पत्र प्राप्त कर मांग पत्र जारी किए जा चुके हैं। इस योजना में 3 लोगों ने आवेदन किया है।
सौर ऊर्जा के प्रति किसानों में रूचि बढ़ी
जिले के किसानों में सौर ऊर्जा के प्रति रूचि बढ़ रही है। प्रधानमंत्री कुसुम कंपोनेंट योजना में किसान विद्युत संयंत्र लगान के लिए आगे आ रहे हैं।जेएल मीणा
अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम अलवर
Published on:
24 Apr 2023 11:49 pm
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