
चुनावी चौपालों में क्यूं नहीं हो रही मुद्दों पर चर्चा
अलवर. आगामी विधानसभा चुनाव में भले ही अभी दो महीने से ज्यादा का समय बचा हो, लेकिन चुनावी चर्चा शहरी परिधि को पार कर अब गांवों की चौपाल तक पहुंचने लगी है। खास बात यह कि सालों से समस्याओं से जूझते रहे, लेकिन चुनावी चर्चा में मुद्दों के बजाय अभी चेहरों पर जोर है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल तानाबाना बुनने में जुटे हैं। अभी प्रमुख दल कांग्रेस एवं भाजपा की जोर आजमाइश प्रत्याशी चयन को लेकर दिखाई पड़ती है। कांग्रेस ने टिकट के दावेदारों के बायोडाटा लेकर पैनल तैयार प्रदेश कांग्रेस को भिजवा दिए। पैनल को अंतिम रूप देने के बाद लोगों में अब चर्चा चल निकली है कि टिकट पर दावेदारी किसकी मजबूत है। वहीं भाजपा में टिकट के दावेदारों के बायोडाटा तो मिल चुके हैं, लेकिन पैनल बनाने का कार्य परिवर्तन यात्रा के बाद होने की उम्मीद है।
हर किसी की जुबां पर टिकट किसको मिलेगा
चुनावी चर्चा के बीच हर किसी जुबां पर टिकट को लेकर चर्चा सुनाई पड़ती है। चौपालों पर चलने वाली चर्चा में टिकट का दावा करने वालों से लेकर पैनल में संभावित नामों पर खूब चर्चा हो रही है। हालांकि चर्चा के केन्द्र में अभी कांग्रेस एवं भाजपा जैसे ही प्रमुख दल हैं। तीसरे दलों को लेकर चर्चा ज्यादा सुनाई नहीं पड़ती।
मुद्दों पर न दल और न ही लोग करते चर्चा
अभी चुनावी चर्चा का केन्द्र राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के नामों की घोषणा तक सीमित है। इन चर्चा में न राजनीतिक दल मुद्दों की बात करते सुनाई पड़ते हैं और न ही लोग मुद्दों को लेकर कोई बात करते दिखाई पड़ते हैं। यह िस्थति तो तब है जब लोग लंबे समय से अनेक समस्याओं से ग्रस्त हैं। जिले में पानी को लेकर हाहाकार में अभी कमी नहीं आई है, रास्ता जाम जैसी समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। इसके अलावा महंगाई, अपराध, मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी अनेक समस्याओं से लोगों को रुबरू होना पड़ता है, लेकिन चुनावी चर्चा में ये मुद्दे अभी गौण हैं।
Published on:
17 Sept 2023 11:24 pm
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