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भाजपा व कांग्रेस की नींद किसने उड़ाई

विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस एवं भाजपा की नींद इन दिनों उड़ी पड़ी है। इन दलों की नींद तीसरे मोर्चे ने उड़ाई रखी है। दोनों ही प्रमुख दलों की नींद तीसरे मोर्चे के दलों की रणनीति उजागर नहीं हो पाने से उड़ी पड़ी है। इसका कारण है कि पिछले चुनाव में अलवर जिले में तीसरे मोर्चे के दल प्रमुख राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बिगाड़ते रहे हैं।

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अलवर

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Prem Pathak

Sep 18, 2023

भाजपा व कांग्रेस की नींद किसने उड़ाई

भाजपा व कांग्रेस की नींद किसने उड़ाई


अलवर. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ज्यादातर लोगों की नजरें कांग्रेस एवं भाजपा पर टिकी है, लेकिन इन दाेनों की निगाहें तीसरे मोर्चे की रणनीति पर टिकी है। कारण है कि पूर्व में हुए चुनाव में तीसरे मोर्चे के दल प्रमुख दलाें का राजनीतिक जायका बिगाड़ चुके हैं। पिछले चुनाव में बसपा ने अलवर जिले में 15 फीसदी से ज्यादा वोट लिए थे।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अभी तक किसी भी दल की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की गई। कांग्रेस एवं भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में उलझे हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशियों की सूची नहीं आने से अभी तीसरे मोर्चे के दल भी देखो और इंतजार करो की रणनीति अपनाए हुए हैं। हालांकि तीसरे मोर्चे के प्रमुख दल बसपा की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा का सिलसिला शुरू पहले ही किया जा चुका है, लेकिन अभी अलवर की 11 सीटों के लिए बसपा ने किसी भी प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। इस कारण कांग्रेस व भाजपा के लिए बसपा की रणनीति चिंता का कारण बनी है।
पहले भी कई सीटों पर बिगाड़ चुकी गणित

तीसरे मोर्चे के प्रमुख दल बसपा ने गत विधानसभा चुनाव में अलवर की 11 में से 2 सीटों पर जीत हासिल की, वहीं रामगढ़ एवं कुछ सीटों पर प्रमुख दलों का राजनीतिक गणित ही गड़बड़ा दिया। हालांकि बसपा ये दोनों सीटें टिकट नहीं मिलने पर प्रमुख दलों से आए नेताओं के भरोसे ही जीती और चुनाव जीतने के बाद दोनों ही विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस कारण बसपा की रणनीति जल्दबाजी में बाहर से आए नेताओं को टिकट देने के बजाय अच्छी तरह देखकर टिकट देने की है।

प्रत्याशियों की घोषणा के समय हो सकती है भागमभाग

विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस व भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी करने के समय प्रमुख दलों के नेताओं में भागमभाग होने की संभावना है। तीसरे मोर्चे के दल इन्हीं संभावनाओं पर अपनी पैनी निगाह टिकाए हुए हैं।
इस बार बढ़ सकता है तीसरे मोर्चे का दायरा

इस बार विधानसभा चुनाव में प्रदेश में तीसरे मोर्चे का दायरा बढ़ने की संभावना है। कारण है कि बसपा के साथ ही रालोपा, आम आदमी पार्टी, एआइएमआइएम सहित कुछ अन्य छोटे दल भी प्रत्याशी उतार सकते हैं।