
अवैध आरामशीनों पर जारी है प्राणवायु की चिराई
अलवर. करीब 45 लाख आबादी की प्राणवायु को आरा मशीन का अवैध संचालन चीर रहा है। जिले में लाइसेंसशुदा आरा मशीन 151 है, लेकिन अवैध आरा मशीनों का आंकड़ा सरकार के पास भी नहीं है, क्योंकि लंबे समय से अवैध आरा मशीनों का सर्वे ही नहीं हुआ।
आरा मशीनों पर गीली व सूृखी लकडिय़ों की चिराई से हरियाली पर संकट मंडराने लगा है। ज्यादातर अवैध आरा मशीन ग्रामीण क्षेत्रों में होने से हरे पेड़ों की बिना रोक टोक कटाई जारी है।
पेड़ों से मिलती है प्राणवायु
हरे पेड़ प्राणवायु ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत हैं। छोटे लालच के फेर में लोग हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर प्राणवायु को ही चीरने में जुटे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरों की तर्ज पर पर्यावरण संतुलन गड़बड़ाने लगा है।
सरकार वैध आरामशीन तक सीमित, अवैध का अंदाजा नहीं
वन विभाग के पास जिले में लाइसेंसशुदा आरा मशीन का रेकॉर्ड है, लेकिन बिना लाइसेंस चलने वाली आरा मशीन की विभाग को जानकारी नहीं है। लंबे समय से जिले में अवैध आरा मशीनों का सर्वे ही नहीं कराया गया है।
नाममात्र की कार्रवाई
अवैध आरा मशीन संचालन की जानकारी नहीं होने से विभाग ऐसी मशीन संचालकों के खिलाफ लम्बे समय से कार्रवाई भी नहीं कर पाया है। शिकायत मिलने पर ही कुछ समय पूर्व वन विभाग की टीम ने कोटकासिम क्षेत्र में अवैध आरामशीन संचालन को लेकर कार्रवाई की।
नवीनीकरण का अधिकार
न्यायालय के आदेश अनुसार वन विभाग ने फिलहाल आरा मशीन के नए लाइसेंस जारी करने पर पाबंदी लगा रखी है। विभाग अभी पूर्व में जारी लाइसेंस के नवीनीकरण में सक्षम है। पूर्व में संचालित आरा मशीनों के नाम व स्थल परिवर्तन का अधिकार भी वन विभाग के मुख्य संरक्षक (सीसीएफ) को है।
कार्रवाई के लिए कमेटी की योजना का इंतजार
जिले में आरा मशीनों के अवैध संचालन के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के निर्णय का इंतजार है। इस कमेटी में जिला पुलिस अधीक्षक, वन विभाग के डीएफओ, बिजली निगम के अधिकारी सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं। समिति ने लंबे समय से जिले में आरा मशीनों के अवैध संचालन के खिलाफ कार्रवाई की योजना नहीं बनाई है।
शिकायत पर होती है कार्रवाई
आरा मशीन के अवैध संचालन के खिलाफ शिकायत मिलने पर विभाग कार्रवाई करता है। पिछले दिनों कोटकासिम क्षेत्र में कार्रवाई की गई। आरा मशीन के नए लाइसेंस जारी करने पर बैन है।
डॉ. आलोक गुप्ता
डीएफओ, वन मण्डल अलवर
Updated on:
08 Aug 2019 12:23 am
Published on:
08 Aug 2019 06:00 am
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