
देवस्थान विभाग कार्यालय अलवर
देवस्थान विभाग से जुड़े सैकड़ों मंदिरों की सुध लेने वाला आज कोई नहीं बचा है। विभाग पिछले कई वर्षों से अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है, जिसका सीधा असर मंदिरों की निगरानी और रखरखाव पर पड़ रहा है। स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग के सहायक आयुक्त महेंद्र देवतवाल को अकेले ही अलवर समेत सीकर, झुंझुनूं, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा जैसे पांच बड़े जिलों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। एक ही अधिकारी के पास इतने जिलों का प्रभार होने के कारण वे किसी भी जिले को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक काम पूरी तरह अटक गए हैं।
हैरानी की बात यह है कि विभाग में निरीक्षक के पद पर भी स्थाई नियुक्ति नहीं है, बल्कि वहां एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर लगाया गया है, जो सप्ताह में केवल एक दिन ही कार्यालय पहुंचता है। बाकी समय विभाग की पूरी व्यवस्था एक महिला सहायक कर्मचारी के भरोसे टिकी रहती है। अगर वह कर्मचारी किसी काम से बाहर चली जाए या अदालती मामलों के सिलसिले में कोर्ट जाना पड़े, तो अक्सर कार्यालय पर ताला लटका मिलता है। विभाग का इतिहास देखें तो 1997 में जब सहायक आयुक्त कार्यालय बना था, तब इसमें केवल सीकर और झुंझुनूं जिले शामिल थे। 2006 में अलवर को जोड़ा गया और 2024 में दो नए जिले और जोड़ दिए गए, लेकिन काम बढ़ने के बावजूद कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई।
स्टाफ की कमी का असर केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कानूनी और वित्तीय काम भी प्रभावित हो रहे हैं। जिले के मंदिरों से जुड़े लगभग 100 से ज्यादा मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं, जिनकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है। इसके अलावा, सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं जैसे तीर्थयात्रा योजना का क्रियान्वयन करना भी अब विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यहां तक कि मंदिरों के पुजारियों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनमें भी रोष व्याप्त है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अलवर जिले में वर्तमान में सुपुर्दगी श्रेणी के 36 और आत्मनिर्भर श्रेणी के 8 मंदिर हैं, जबकि सहायता प्राप्त श्रेणी के मंदिरों की संख्या 200 है। इसके अलावा विभाग को लगभग 400 ट्रस्टों की भी देखरेख करनी होती है। इतनी बड़ी संख्या में मंदिरों और ट्रस्टों को संभालने वाला कोई ठोस तंत्र मौजूद न होने के कारण ट्रस्टों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं की गईं, तो करोड़ों की संपत्तियों वाले इन मंदिरों और ट्रस्टों की व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो सकती है।
Updated on:
15 May 2026 11:23 am
Published on:
15 May 2026 11:23 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
