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अलवर मिनी सचिवालय के लिए राज्य सरकार से 40 करोड़ रूपए स्वीकृत, अब फिर से काम शुरू होने की आस

राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों ही 40 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिनी सचिवालय निर्माण कार्य के लिए हुई है, इससे कलक्टेट के जल्द ही मिनी सचिवालय में स्थानांतरित होने की आस जगी है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Jul 05, 2021

Alwar Mini Sachivalaya: 40 Crore Sanctioned For Mini secretariat

अलवर मिनी सचिवालय के लिए राज्य सरकार से 40 करोड़ रूपए स्वीकृत, अब फिर से काम शुरू होने की आस

अलवर. राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट मिनी सचिवालय आठ साल में भी पूरा नहीं हो पाने से कलक्ट्रेट शिफ्टिंग का सपना भले ही अभी अधूरा हो, लेकिन मिनी सचिवालय जल्द शिफ्ट होने की उम्मीद में आसपास के क्षेत्र की प्रोपर्टी के दाम जरूर कई गुना बढ़ गए हैं। हालांकि राज्य सरकार की ओर से पिछले दिनों ही 40 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिनी सचिवालय निर्माण कार्य के लिए हुई है, इससे कलक्टेट के जल्द ही मिनी सचिवालय में स्थानांतरित होने की आस जगी है।

प्रशासन, पुलिस व अन्य प्रमुख विभागों के कार्यालयों को एक छत के नीचे शिफ्ट करने के लिए राज्य सरकार ने अलवर में मिनी सचिवालय निर्माण को स्वीकृति दी। सरकार के इस डीम प्रोजेक्ट को शुरू हुए करीब 8 साल का लंबा समय बीत गया, लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाने से कलक्ट्रेट, पुलिस व अन्य प्रमुख कार्यालय अब तक मिनी सचिवालय में शिफ्ट नहीं हो सके हैं। नवनिर्मित मिनी सचिवालय का निर्माण कई महीने से अंतिम चरण में अटका हुआ था।

कभी बजट की मार, कभी भ्रष्टाचार से लाचार

मिनी सचिवालय के निर्माण कार्य में कभी बजट का अभाव तो कभी भ्रष्टाचार की परतें आड़े आती रही। मुख्य रूप से यह प्रोजेक्ट राजस्थान सरकार का है और इसकी कार्यकारी एजेंसी राजस्थान अरबन डिकिंग वाटर सीवरेज एंड इंफ्रास्टक्चर कॉपोरेशन लि. (रुडसिको) है। यूआईटी को बजट व्यवस्था का जिम्मा सौंपा गया। इस प्रोजेक्ट में तीन एजेंसिंयों की भागीदारी के चलते यहां घटिया निर्माण और फर्जीवाड़ा की पोल भी खुलती रही, जिससे निर्माण कार्य में देरी होती रही।

दीवार खुरची तो उधड़ी भ्रष्टाचार की परतें

पूर्व में श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली के साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह मिनी सचिवालय के निर्माण कार्य का हाल जानने पहुंचे तो वहां अनियमितता व फर्जीवाड़ा मिला। यहां निर्माण कार्य में तय ब्रांड की जगह दूसरी कम्पनी की टाइलें लगी मिली। उन्होंने टाइल्स लगाने का कार्य बंद कराने और तीसरी एजेंसी से फर्जीवाड़े की जांच कराकर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान दीवारों के प्लास्तर की गुणवत्ता हाथ से खुरच कर जांची तो वह नीचे गिरने लगा। वहीं निर्माण कार्य पूरा होने से पहले आरसीसी के लटकने व अन्य खामियों भी पाई गई। हालांकि अगले दिन जिस जगह से दीवार को खुरचा गया केवल उसी जगह पर सीमेंट लगा पल्ला झाड़ लिया गया। खास बात ये कि रुडसिको को ही थर्ड पार्टी जांच कराने का जिम्मा सौंप दिया गया।

प्रथम तल पर होगा कलक्टर कार्यालय

मिनी सचिवालय के प्रथम तल पर कलक्ट्रेट का सबसे बड़ा जिला कलक्टर कार्यालय शिफ़्ट होना है। पूरे कलक्ट्रेट परिसर को स्थानांतरित करने के लिए प्रथम तल पर करीब 50 कमरों की जरूरत होगी। प्रथम तल पर 50 से 55 कमरों की उपलब्धता है। वहीं द्वितीय तल पर पुलिस के सभी बड़े अधिकारी व अन्य स्टाफ के कार्यालय होंगे। तीसरे तल पर कलक्ट्रेट परिसर स्थित अन्य विभागों के कार्यालयों को स्थानांतरित किया जाना है। तहसील कार्यालय पहले ही भूमितल पर शिफ्ट किया जा चुका है।

अभी सरकार को कम, निजी प्रोपटी को ज्यादा फायदा

मिनी सचिवालय का निर्माण पूरा नहीं होने से अभी सरकार को ज्यादा लाभ नहीं हुआ, लेकिन निजी प्रोपर्टी के दाम बढऩे से आसपास के लोगों को जरूर फायदा हुआ है। कलक्टेट जल्द शिफ्ट होने की संभावना के चलते समीपवर्ती मालवीय नगर कॉम्प्लेक्स, यहां स्थित दुकानों व मकानों की दर में कई गुना उछाल आया है। मालवीय नगर में आवासीय व व्यावसायिक जमीन के दाम भी कई गुना बढ़ गए। स्कीम नंबर आठ में यूआईटी की व्यावसायिक जमीन, यहां बन रहे फ्लैट की दरों में वृद्धि हुई है। प्रताप आडिटोरियम के पीछे व्यावसायिक जमीन के दाम कई गुना बढ़ गए। मिनी सचिवालय के आसपास आवासीय फ्लैट व व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण में तेजी आई है। शांति कुंज में एक गैर सरकारी आवासीय कॉलोनी विकसित हो गई।

मिनी सचिवालय के लिए 40 करोड़ की राशि स्वीकृत

राज्य सरकार ने मिनी सचिवालय निर्माण कार्य के लिए 40 करोड़ की राशि स्वीकृत की है। इससे मिनी सचिवालय का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जा सकेगा।
नन्नूमल पहाडिय़ा, जिला कलक्टर एवं अध्यक्ष यूआइटी अलवर

फैक्ट फाइल

2010-11 की बजट घोषणा में स्वीकृत
2013 में निर्माण कार्य शुरू

2-3 साल में पूरा होना था निर्माण
140 करोड़ रुपए राशि के वर्क ऑर्डर जारी

2015- प्रोजेक्ट की लागत घटा 85 करोड़ की
अब तक 75 करोड़ रुपए हो चुके खर्च

अभी 30 करोड़ राशि के चल रहे कार्य
30-40 करोड़ राशि अन्य भवन व लोन व ब्याज में खर्च

राज्य सरकार ने 40 करोड़
की राशि और स्वीकृत की