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ढाई करोड़ रुपए से अलवर म्यूजियम का होगा कायाकल्प

आमेर विकास प्राधिकरण करवाएगा काम, टेंडर खुलने का है इंतजारअलवर संग्रहालय की स्थापना 1940 में हुई थी। तत्कालीन महाराज व अलवर के अंतिम शासक तेज ङ्क्षसह के शासनकाल में इसको बनाया गया।  
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ढाई करोड़ रुपए से अलवर म्यूजियम का होगा कायाकल्प

ढाई करोड़ रुपए से अलवर म्यूजियम का होगा कायाकल्प

अलवर म्यूजियम की सैर के लिए आने वाले सैलानियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही यह म्यूजियम नए रूप रंग में नजर आएगा। इसका कायाकल्प होने वाला है। इसमें करीब ढाई करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य करवाया जाएगा। पुरातत्व विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके लिए आमेर विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने इसके लिए टेंडर भी कर दिए हैं लेकिन आचार संहिता के चलते अभी टेंडर नहीं खुल पा रहे हैं। आचार संहिता हटते काम होंगे। अलवर संग्रहालय की स्थापना 1940 में हुई थी। तत्कालीन महाराज व अलवर के अंतिम शासक तेज ङ्क्षसह के शासनकाल में इसको बनाया गया।


बजट में हुई थी घोषणा

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के कार्यवाहक संग्रहालयाध्यक्ष विनीत गोदारा ने बताया कि बजट घोषणा 2024-25 में राजकीय म्यूजियम के उन्नयन करने के लिए 50 करोड रुपए खर्च किए जाने की घोषणा की गई थी। इस राशि से अलवर सहित राज्य के दस म्यूजियम में काम करवाया जाएगा। इसके लिए टेंडर हो चुके हैं, खुले नहीं है। यहां काम होने से पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और ऐतिहासिक सामग्री लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी। हमारी आने वाली पीढ़ी भी इसे देख पाएगी।

पहले भी हो चुका है करोडों का काम
अलवर म्यूजियम में करीब सात साल पहले भी करीब दो करोड़ रुपए की लागत से काम करवाया गया था। इसके तहत यहां रंग-रोगन, लाइट फिङ्क्षटग आदि का काम करवाया गया। यहां रखी ऐतिहासिक वस्तुओं के लिए शोकेस बनवाए, नया फर्नीचर बनवाया गया। यहां प्रदर्शित सामग्री पर संक्षिप्त जानकारी लिखी गई ताकि पर्यटकों को समझने में आसानी रहे।


राजस्थान का दूसरा बड़ा संग्रहालय है अलवर

गौरतलब है राजस्थान में अलवर का म्यूजियम प्रदर्शित वस्तुओं की संख्या की ²ष्टि में दूसरे स्थान पर है। इसमें एक म्यान में दो तलवार, अकबरनामा, बाबरनामा, इंग्लैंड से लाई गई गियर वाली साइकिल,चांदी की मेज, कश्मीरी लकड़ी से तैयार सोने के पानी का काम वाला राजा का ङ्क्षसहासन पर्यटकों को आकर्षित करता है। हस्तलिखित ग्रंथ व ऐतिहासिक मूर्तियां, पेंङ्क्षटग्स आदि का दुर्लभ संग्रह है, जो अन्य कहीं देखने को नहीं मिलते हैं। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक यहां सैर के लिए आते हैं।
फैक्ट फाइल
मूर्तियों की संख्या- 234
शिलालेख - 11
सिक्के - 9702
पेंङ्क्षटग- 2565
हथियार-2270