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जागो सरकार! कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान में सोने को मजबूर अन्नदाता, इस हाल में प्याज के ऊपर गुजरती है रात

जो किसान दिन-रात मेहनत करके आपकी सब्जी के स्वाद को बढ़ाने के लिए प्याज उगाता है, उसकी रात इस तरह ठंड में बीतती है।

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जागो सरकार!  कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान में सोने को मजबूर अन्नदाता, इस हाल में प्याज के ऊपर गुजरती है रातAlwar Onion Farmers Sleeping Without Shelter In Winter

जागो सरकार! कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान में सोने को मजबूर अन्नदाता, इस हाल में प्याज के ऊपर गुजरती है रात

धर्मेंद्र अदलक्खा/अंशुम आहूजा.

अलवर. करोड़ों की लागत से मंडी यार्ड बनने और मंडी टैक्स देने के बावजूद 6 डिग्री तापमान के बीच हमारा अन्नदाता तो खुले में सो रहा है। वो अपनी फसल प्याज के कट्टों पर ही सो जाता है। उसे तडक़े प्याज बेचकर वापस जाना है। यहां मंडी समिति की ओर से उनके रहने व बिस्तरों तक का कोई इंतजाम नहीं है। 2011 में यहां डेढ़ करोड़ की लागत से बना किसान भवन में ताले लगे हुए हैं।

देश में ख्याति नाम अलवर की प्याज मंडी में प्याज आ रहा है कि किसान रात को अपना प्याज लेकर आना शुरू हो जाते हैं। यहां तडक़े 3 बजे से प्याज की बोली लगना शुरू हो जाती है। किसान जिले भर से वाहनों में अपना प्याज कट्टों में भरकर यहां पहुंच रहा है। प्याज इतना आ रहा है कि प्याज व सब्जी मंडी में वाहन खड़े करने की जगह नहीं है। चारों तरफ प्याज के कट्टे ही कट्टे दिखाई दे रहे हैं। यहां एक ही दिन में 50 हजार कट्टो तक आवक हो रही है जो एक लाख कट्टो तक पहुंच गई थी।

यहां आने वाले किसान शाम व देर रात को पहुंचते हैं। यहां उन्हें सोने का कोई ठिकाना नहीं मिलता है। ऐसे में वे रात को कभी 4 डिग्री तो कभी 6 डिग्री तापमान के बीच रात को कट्टों के ऊपर ही सो जाते हैं। कई किसान अपने साथ रजाई तक नहीं लाते हैं जो शॉल ओढकऱ सोते रहते हैं। कुछ किसान तो पूरी रात अलाव जलाकर तापते रहते हैं।

पत्रिका ने जाना आधी रात को किसानों का दर्द-

गुरुवार की मध्य रात को पत्रिका की टीम अलवर प्याज व सब्जी मंडी पहुंची। यहां चारों तरफ प्याज के कट्टे दिखाई दे रहे थे। यहां किसान तेज सर्दी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर थे। पत्रिका रिपोर्टर ने देखा कि बेरला के महेन्द्र, तिजारा के गांव जाट मलीट से आए असमुदीन , टपूकड़ा के रोशन लाल, पलखड़ी के अमरदीन, उमरैण के नरेश यादव सहित काफी संख्या में किसान खुले आसमान के नीचे सो रहे थे। इन्होंने बताया कि हम रात को प्याज छोडकऱ कहा जाए? यहां किसान भवन तो बंद है जिस पर तालें लगे हैं। मंडी में इतनी गंदगी थी कि वहां कुछ देर रुकना ही मुश्किल हो रहा था।

यहां तो 2011 में बन गया था किसान भवन-

अलवर कृषि उपज मंडी में 2011 में डेढ़ करोड़ की लागत से किसान भवन बन गया था। इसे अभी तक नहीं चलाया गया। किसानों को रात में रियायती दरों पर रुकने के लिए बने किसान भवन को पीपीई मोड पर चलाने का भी निर्णय हुआ लेकिन यह खुल नहीं पाया। ऐसे में यह क्षतिग्रस्त होने लगा है।

प्याज से तो पांच करोड़ टैक्स ही मिल गया-

इस बार अलवर मंडी में 5 लाख क्विंटल प्याज आने की संभावना है। मंडी में इस समय प्याज के भाव औसत 15 से 25 रुपए हैं। यदि औसत भाव 25 रुपए माने तो इस साल अलवर कृषि उपज मंडी को 2 प्रतिशत किसान कल्याण कोष राशि के नाम पर 5 करोड़ की राशि प्राप्त होगी। इसके बावजूद किसानों की कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।

किसानों के लिए शेड बनवाएंगे-

अलवर मंडी में इतना प्याज आ रहा है कि यहां सारी जगह छोटी पड़ रही है। ऐसे में यहां प्याज मंडी में डेढ़ करोड़ की लागत से विकास कार्य होंगे। यहां किसानों के रुकने का कोई इंतजाम नहीं है। सरकार को शेड बनाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

- मोहन सिंह जाट, सचिव, कृषि उपज मंडी समिति, अलवर।