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सरपंची की चकाचौंध के आगे फीका हुआ पंच का आकर्षण

अलवर. समाज में भले ही पंच को परमेश्वर का दर्जा मिला हो, लेकिन सरपंची पद की चकाचौंध के आगे उसका आकर्षण फीका है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में कठूमर, रैणी व तिजारा पंचायत समितियों के 11 वार्ड ऐसे हैं, जहां किसी ने भी नामांकन नहीं किया, जबकि 677 वार्डों में एक ही प्रत्याशी होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन हो गया।

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अलवर

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Prem Pathak

Jan 14, 2020

सरपंची की चकाचौंध के आगे फीका हुआ पंच का आकर्षण

सरपंची की चकाचौंध के आगे फीका हुआ पंच का आकर्षण

अलवर. समाज में भले ही पंच को परमेश्वर का दर्जा मिला हो, लेकिन सरपंची पद की चकाचौंध के आगे उसका आकर्षण फीका है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव के प्रथम चरण में कठूमर, रैणी व तिजारा पंचायत समितियों के 11 वार्ड ऐसे हैं, जहां किसी ने भी नामांकन नहीं किया, जबकि 677 वार्डों में एक ही प्रत्याशी होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन हो गया। अब केवल 696 वार्डों में 1742 प्रत्याशियों के बीच पंच पद के लिए मुकाबला होगा, यानि ज्यादातर जगह सीधा या फिर तिकोना संघर्ष है, जबकि प्रथम चरण की 120 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 1001 उम्मीदवारों के बीच घमासान होगा। यानि सरपंच के एक पद के लिए 9 से 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

पंचायत चुनाव को लेकर इन दिनों गांवों में सुबह से देर रात तक लोगों के घर वोट मांगने वालों की कतार दिखाई पड़ती है, लेकिन ग्रामीणों से वोट मांगने वालों में ज्यादातर सरपंच पद के उम्मीदवार हैं। पंच पद के लिए वोट मांगने वाले प्रत्याशियों का लोगों को इंतजार ही है।

प्रथम चरण में करीब आधे पंच निर्विरोध निर्वाचित
पंच पद के प्रति लोगों में ज्यादा क्रेज नहीं होने का अंदाजा इन तथ्यों से सहज ही लगाया जा सकता है कि प्रथम चरण की कठूमर, रैणी व तिजारा पंचायत समिति में 1384 वार्डों में पंच पद का निर्वाचन होना है। इनमें करीब आधे 677 वार्डों में एक ही प्रत्याशी होने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आई और निर्विरोध चुनाव हो गया। वहीं 11 वार्डों में किसी भी ग्रामीण ने पंच पद का चुनाव लडऩे के प्रति इच्छा ही नहीं जताई। प्रथम चरण में केवल 696 वार्ड ही ऐसे हैं जहां पंच पद के लिए ग्रामीणों में कुछ उत्सुकता दिखाई दी। इन 696 वार्डों में 1742 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

गांवों की योजना सरपंच के हाथों में

देश के विकास की योजना के क्रियान्वयन की मुख्य धुरी ग्राम पंचायत है। मनरेगा से लेकर केन्द्र व राज्य सरकार की ज्यादातर योजनाओं की क्रियान्विति के लिए बजट ग्राम पंचायत के पास आता है। इस कारण सरपंच की पॉवर व हैसियत बड़ी मानी जाती है। इस कारण पंचायत चुनाव में सरपंच पद के चुनाव का महत्व ज्यादा है। हालांकि ग्राम पंचायत की बैठकों में पंच की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है, लेकिन उनकी भूमिका बैठकों में प्रस्ताव लेने तक सीमित रहती है। यही कारण है कि ग्रामीणों में सरपंच पद को लेकर खासा क्रेज है।

प्रथम चरण में पंच पद के चुनाव का गणित

पं. समिति कुल वार्ड वार्ड प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव खाली वार्ड

कठूमर 535 294 759 239 2

रैणी 318 199 511 119 0

तिजारा 531 203 472 319 9

योग 1384 696 1742 677 11