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अलवर की गाय-भैस पी रही दूध और छाछ

लॉकडाउन के कारण बहुत कुछ बदलता नजर आने लगा है। किसान अपने छोटे पशुओं को पहले से अधिक दूध पिलाने लगे हैं।

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अलवर की गाय-भैस पी रही दूध और छाछ

अलवर की गाय-भैस पी रही दूध और छाछ

अलवर की गाय-भैस पी रही दूध और छाछ
अलवर.
लॉकडाउन के कारण बहुत कुछ बदलता नजर आने लगा है। पहले की तरह गांवों से दूध संकलन से लेकर वितरण सब प्रभावित हो चुका है। जिसके कारण हम देख रहे हैं कि गांवों में दूर-दराज रहने वाले परिवार पहले जिन दूधियों को दूध देते थे उनके जरिए खरीद बंद हो गई है। जिसके कारण घर में दूध से छाछ-घी अधिक बनाने लगे हैं। जिसका असर यह है कि दूध से बनने वाले छाछ सहित अन्य उत्पाद परिवार के सदस्यों की तरह पशुओं के भी हिस्से आने लगे हैं। जिन पशुपालकों के पास अधिक दूध है उनको छाछ पशुओं को पिलानी पड़ती है। सम्पन्न किसान अपने छोटे पशुओं को पहले से अधिक दूध पिलाने लगे हैं।
लॉकडाउन में सब बंद, दूध खपत कम
लॉकडाउन में सब खान-पान के सब बाजार बंद है। जिसके कारण हर जगह दूध की खपत कम हो गई है। हालांकि अभी सरस के जरिए दूध का संकलन होता है लेकिन, खपत पहले से काफी कम हो गई है। जिसका असर गांव में पशुपालक पर भी पड़ा है। वे पहले दूधियों के जरिए दूध देते रहे हैं। अब दूध सप्लाई बंद हो गई। जिसके कारण उनको घर में ही दूध को काम लेना पड़ रहा है।
सरस में पहुंच रहा 1.75 लाख लीटर रोज
अब बाजार में दूध की खपत नहीं के बराबर हो जाने से सरस के जरिए ही दूध खरीदा जाता है। रोजाना करीब 1.75 लाख लीटर दूध संकलन हो रहा है। हालांकि सप्लाई केवल 90 हजार लीटर है। लेकिन, सरस में दूध की बराबर आवक है। सरस के अधिकारियों का कहना है कि बाजार में दूध नहीं खप रहा। जिसके कारण अब पशुपालकों को घर में भी काम लेना पड़ रहा है।