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चरस-गांजे के धुएं में ‘उड़ता अलवर का युवा , सांसों में घुल रहा धुआं

नशे के सौदागर जिले में जगह-जगह युवाओं को अवैध रूप से बेच रहे चरस और गांजा, पुलिस नहीं दे रही है ध्यान

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चरस-गांजे के धुएं में 'उड़ता अलवर का युवा  ,  सांसों में  घुल  रहा धुआं

चरस-गांजे के धुएं में 'उड़ता अलवर का युवा , सांसों में घुल रहा धुआं


सुजीत कुमार

अलवर. नशे के जाल में फंस अलवर भी Óउड़ता पंजाबÓ बन चुका है। युवाओं की सांसों में चरस-गांजे का धुआं घुल रहा है, जो कि उन्हें खोखला कर रहा है। अलवर में नशे के जाल को समेटने के लिए पुलिस प्रशासन सख्त कदम नहीं उठा रहा है। पत्रिका ने चरस-गांजे के नशे की जड़ों को खोदा तो वह काफी गहरी नजर आई। अलवर में जगह-जगह Óरक्तबीजÓ की तरह से नशे के सौदागर बैठे हुए हैं, जो कि पुलिस की शह पर खुलेआम चरस-गांजा बेच रहे हैं। वहीं, चरस-गांजा पीने वाले युवाओं की संख्या भी कई हजारों में है। पत्रिका ने रविवार को ङ्क्षस्टग ऑपरेशन कर चरस-गांजे के सौदागरों और नशे के आदी युवाओं को कैमरे में कैद किया।
चरस 2 हजार की 50 ग्राम, गांजा 100 रुपए का 4 ग्राम
अकेले अलवर शहर की बात करें तो दो दर्जन से ज्यादा चरस-गांजा बेचने वाले सौदागर सक्रिय हैं। अलवर में हरियाणा के गुरुग्राम व झिरका फिरोजपुर, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश से तस्करी कर चरस-गांजा सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा भरतपुर के नगर और नदबई से भी चरस-गांजा अलवर लाया जा रहा है। अलवर के तस्करों को चरस 20 से 25 हजार रुपए किलो तथा गांजा 6 से 7 हजार रुपए किलो मिल रहा है। जो कि ग्राहकों को चरस की 50 ग्राम की गोली दो-ढाई हजार रुपए तथा गांजे की 4 ग्राम की पुडिय़ा 100 से 150 रुपए में बेच रहे हैं।

शहर में नशेबाजों के कई ठिकाने
अलवर शहर की बात करें तो यहां चरस और गांजा का नशा करने वाले नशेबाजों के कई ठिकाने बने हुए हैं। ये नशेबाज प्रतापबांध क्षेत्र, बायो डायवर्सिटी पार्क, सागर, मूसी महारानी की छतरी और किशनकुंड आदि जगह जाकर चरस-गांजा पीते हैं। इसके अलावा ये लोग शहर में कई सुनसान इलाकों में जाकर भी चरस-गांजे का नशा करते हैं। Ó

यहां खुलेआम बिक अलवर शहर के चमेलीबाग सामुदायिक भवन के पास, अखैपुरा, प्रतापबांध, लादिया, अशोका टाकीज के समीप, फूटीखेल, शिवाजी पार्क, रूपबास, मूंगस्का, एनईबी, बहरोड़ रोड व आरटीओ ऑफिस के पास तथा जिले के विजय मंदिर, डहरा, चिकानी, किशनगढ़बास, खैरथल, तिजारा, मुण्डावर, भिवाड़ी, बहरोड़, गोङ्क्षवदगढ़, बड़ौदामेव व थानागाजी आदि इलाकों में चरस और गांजा खुलेआम बिक रहा है। रहा चरस-गांजा
तस्कर और रिपोर्टर के बीच बातचीत
रिपोर्टर : भाई, मुझे राकेश (बदला हुआ नाम) ने भेजा है।
तस्कर : हां, बोल भाई।
रिपोर्टर : माल मिल जाएगा क्या?
तस्कर : मिल जाएगा, कौनसा चाहिए?
रिपोर्टर : गांजा
तस्कर : जेब में पुडिय़ा निकालते हुए बोला...ये ले, 100 रुपए दे।
रिपोर्टर : भाई, माल तो बढिय़ा है ना
तस्कर : टेंशन मत ले भाई, मेरे पास अलवर में सबसे बढिय़ा माल मिलता है।

तस्कर और रिपोर्टर के बीच बातचीत
रिपोर्टर : भाई, मुझे राकेश (बदला हुआ नाम) ने भेजा है।
तस्कर : हां, बोल भाई।
रिपोर्टर : माल मिल जाएगा क्या?
तस्कर : मिल जाएगा, कौनसा चाहिए?
रिपोर्टर : गांजा
तस्कर : जेब में पुडिय़ा निकालते हुए बोला...ये ले, 100 रुपए दे।
रिपोर्टर : भाई, माल तो बढिय़ा है ना
तस्कर : टेंशन मत ले भाई, मेरे पास अलवर में सबसे बढिय़ा माल मिलता है। ्र
कॉलेज


अलवर में चरस और गांजे का अवैध कारोबार करने वाले सौदागरों की कॉलेज सहित शहर के युवाओं में जबरदस्त पैठ है। हजारों की संख्या में युवा इनके नियमित ग्राहक हैं, जो कि इन सौदागरों से चरस-गांजा खरीदते हैं। युवा गांजे को एक सफेद रंग के बटर पेपर में भर उसकी सिगरेट बनाकर पीते हैं। ये बटर पेपर शहर में पान की दुकानों पर खुलेआम बिक रहा है। वहीं, चरस और गांजे को लोग सिगरेट या चिलम में भरकर भी पीते हैं। ों तक पैठ, पान की
दुकान पर मिल रहा पेपर

लगातार कार्रवाई
कर रहे
&अलवर में अवैध नशे का कारोबार के खिलाफ पुलिस की ओर से एनडीपीएस एक्ट में लगातार कार्रवाई जारी है। यह बात सही है कि अलवर में नशे का अवैध कारोबार बढ़ा है, लेकिन उसकी के अनुसार पुलिस की कार्रवाई भी बढ़ी है। पिछले सालों की तुलना में पुलिस की ओर से इस साल अब तक एनडीपीएस एक्ट की काफी अधिक कार्रवाई की गई है। जहां भी ऐसी कोई सूचना मिलती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती है।
- तेजस्वनी गौतम,
जिला पुलिस अधीक्षक, अलवर।