
साढ़े तीन महीने में भी नहीं मिली बाघिन एसटी-5, पुष्टि अब तक नहीं, मौत की घोषणा में देरी से शिकारियों को मिल सकता है साक्ष्य मिटाने का मौका
अलवर. सरिस्का में करीब साढ़े तीन महीने की सघन के खोज के बाद भी बाघिन एसटी-5 नहीं मिल सकी, लेकिन सरिस्का प्रशासन अभी बाघिन की मौत की पुष्टि करने में हिचकिचा रहा है। हालांकि स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ पहले ही कह चुका है कि सरिस्का में बाघिन एसटी-5 नहीं है। इसके बाद भी बाघिन की मौत की पुष्टि में लंबा समय शिकारियों को शिकार के साक्ष्य मिटाने का मौका दे सकता है।
सरिस्का में बाघिन एसटी-5 की अंतिम लोकेशन गत 24 फरवरी को मिली। इसके बाद सरिस्का में बाघिन के कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए। इसी दौरान सरिस्का में बाघ एसटी-11 का इंदौक में शिकार हो गया। एक बाघिन के गायब होने और एक बाघ के शिकार की घटना ने सरिस्का प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया। वहीं बाघिन की मौत की पुष्टि में देरी से शिकारियों को शिकार के साक्ष्य मिटाने का मौका भी मिलने की आशंका बढ़ गई है। यह स्थिति को तब है जब स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ के सदस्य खुद सरिस्का में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के बाद सरिस्का में बाघिन एसटी-5 के नहीं होने की बात बयां कर चुके हैं। इसके बाद भी सरिस्का प्रशासन बाघिन की मौत की पुष्टि करने एवं वन्यजीव अधिनियम के तहत बाघिन के गायब होने का मामला दर्ज कराने में हिचकिचा रहा है।
खूब जतन किए पर नहीं मिली बाघिन
सरिस्का प्रशासन भी बाघिन एसटी-5 को ढूंढने के सभी जतन कर चुका है, लेकिन वह बाघिन के जिंदा होने का एक भी साक्ष्य नहीं जुटा पाया है। गत दिनों बाघिन के सिग्नल मिलने की बात भी गलत निकलने पर सरिस्का में एनटीसीए प्रोटोकॉल के तहत 500 से ज्यादा कैमरे लगाकर तलाश की गई। इन कैमरों में आई 9-10 लाख फोटो में से ज्यादा को देखा जा चुका है, लेकिन उनमें भी बाघिन एसटी-5 कहीं नजर नहीं आई।
सरिस्का पर पहले से रही शिकारियों की नजर
सरिस्का बाघ परियोजना पर कुख्यात शिकारियों की नजर पहले से रही है। बाघों के शिकार के लिए सरिस्का शिकारियों के लिए मुफीद रहा है। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2004 से पहले यहां सभी बाघों का शिकार करने में शिकारी कामयाब रहे। शिकारियों के सरिस्का से तार जुड़े होने से एक बार फिर सरिस्का में बाघों के शिकार की आशंका है। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि पूर्व में शिकारियों ने एक के बाद एक बाघ का शिकार किया और तत्कालीन सरिस्का प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। इसी तरह बाघ एसटी-11 व बाघिन एसटी-5 के गुम होने में भी शिकारियों की भूमिका संभव है।
इसलिए भी बढ़ी आशंका
पिछले दिनों सरिस्का और आसपास गिरफ्तारी एवं वन्यजीवों के अवशेष बरामद होने से बावरिया गिरोह की मौजूदगी पहले ही साबित हो चुकी है। वहीं पिछले दिनों भी सरिस्का में कई जगह वन्यजीवों के अवशेष के साथ शिकारियों को पकड़ा गया है। इस कारण बाघिन एसटी-5 का भी शिकारियों के हाथ लगने की आशंका है। खुद सरिस्का प्रशासन भी बाघिन के शिकार से अब तक इनकार नहीं कर सका है। इस पर तलाश के नाम पर चार महीने का समय बिताना शिकारियों को शिकार के साक्ष्य मिटाने के लिए कम समय नहीं है।
अब शिकार के साक्ष्य मिलना मुश्किल
सरिस्का में बाघिन एसटी-5 को गुम हुए साढ़े तीन महीने का समय बीत गया। इस दौरान न बाघिन मिली और न ही उसके जिंदा होने के कोई साक्ष्य। बाघिन के शिकार की आशंका के चलते इतने लंबे समय बाद अब शिकार के साक्ष्य मिलना भी मुश्किल है। स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की ओर से बाघिन एसटी-5 के नहीं मिलने की पुष्टि के बाद भी सरिस्का प्रशासन की ओर से बाघिन की मौत की पुष्टि में देरी शिकारियों के लिए लाभकारी हो सकती है।
Published on:
17 Jun 2018 09:46 am
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