पर्यटन की दृष्टि से अलवर प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिले की यही पर्यटन ख्याति सुन देश व प्रदेश के अनेक जिलों से पर्यटक यहां सैर के लिए आते हैं, लेकिन जब उन्हें पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं नहीं मिलती तो वे निराश होकर लौटते हैं, साथ ही अलवर की ख्याति को भी नुकसान पहुुंचता है। ऐसा ही कुछ इन दिनों सिलीसेढ़ झील पर्यटन स्थल को लेकर हो रहा है। यहां करीब ढाई महीने से पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा नहीं मिल पा रही।अलवर जिले में टाइगर रिजर्व सरिस्का, सिलीसेढ़ झील, अजबगढ़ भानगढ़, अलवर में संग्रहालय, मूसी महारानी की छतरी, सागर, बाला किला समेत अन्य पर्यटन स्थल प्रमुख हैं। अलवर आने वाला पर्यटक सरिस्का, सिलीसेढ़ व अलवर के पर्यटन स्थल पर जरूर पहुंचता है। आगामी एक जुलाई से टाइगर रिजर्व सरिस्का पर्यटकों के लिए तीन महीने बंद रहेगा। इस कारण सिलीसेढ़ का महत्व और बढ़ गया है। लेकिन दूर दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए यहां बोटिंग कर झील का आनन्द लेना मुश्किल है। कारण है कि सिलीसेढ़ की बोटिंग पिछले ढाई महीने से राजस्थान पर्यटन विकास निगम की टेंडर प्रक्रिया में उलझी है। अकेले सिलीसेढ़ में प्रतिमाह करीब 8 हजार पर्यटक पहुंचते हैं।वीकेंड टूरिज्म का सबसे बड़ा स्थल : अलवर एनसीआर में आता है यहां पर वीकेंड टूरिज्म का विशेष उत्साह रहता है। जिसमें दिल्ली, हरियाणा व आसपास के राज्यों से पर्यटक शनिवार व रविवार को अलवर आते हैं। दो दिन यहां पर्यटन स्थलों का आनंद लेते हैं। इसके साथ ही क्रिसमस, शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान यहां रिकार्ड स्तर पर पर्यटक आते हैं।