दोपहर करीब 12 बजे मिश्रो देवी मनरेगा के तहत जोहड़ से मिट्टी खुदाई कर तकारी से पाल पर डाल रही थी। उसके साथ वहां पांच-छह अन्य मजदूर काम कर रहे थे। मिश्रो की तीनों पौती राधा, संगीता और रज्जो पास ही जोहड़ में भरे बरसाती पानी में नहा रही थी। अचानक अपनी आंखों के सामने तीनों पौतियों को जोहड़ में डूबते देख दादी मिश्रो सिर पर रखी तकारी फेंक दी और कोई बचाओ रे...कोई तो बचाओ रे चिल्लाती हुई जोहड़ की तरफ दौड़ी।