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नगर विकास न्यास की आवासीय योजना फेल, 3 हजार से अधिक आवासों में दस फिसदी ही पहुंचे

10 साल में बने मकानों में 10 प्रतिशत नहीं बस सके, 2022 तक सबको घर कैसे?

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अलवर

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Prem Pathak

Jul 21, 2018

Alwar Urban Development Trust's housing scheme fails

नगर विकास न्यास की आवासीय योजना फेल, 3 हजार से अधिक आवासों में दस फिसदी ही पहुंचे

अलवर. साल 2022 तक सबको घर देने का सपना कैसे पूर होगा जब पिछले 10 साल में बनाए गए मकानों में 10 प्रतिशत लोग भी नहीं बस सके हैं। जबकि गरीबों से पैसा लेकर मकानों का आवंटन किया जा चुका है। नहीं रहने की मुख्य वजह वहां पर सड़क, पानी व सीवरेज की मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो सकी है। ऐसे में आगामी चार साल में सबको घर मिलने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा।
हम बात कर रहे हैं अलवर शहर में यूआईटी की ओर से पिछले दस सालों में बनाए गए करीब 3 हजार से अधिक मकानों की। जो बनकर खड़े हो गए और अब जर्जर भी होने लगे हैं। लेकिन उनमें रहने वाले परिवारों की संख्या नहीं बढ रही है। यूआईटी ने अरावली विहार प्रथम, अरावली विहार द्वितीय, अरावली विहार तृतीय व ट्रांसपोर्ट नगर में करीब 2 हजार 263 ईडब्ल्यूएस मकान बनाए हैं। इसके अलावा बुध विहार व मालवीय नगर में करीब 944 ईडब्ल्यूएस मकान बनाए हैं।

2012 में मकान मिले, अब डली लाइन

अरावली विहार द्वितीय में गरीबों को 2012 में मकान आवंटित कर दिए गए थे। जबकि वहां पर अब पानी की लाइन डाली गई है। अभी तक यहां रहने वाले लोग दूर-दूर से पानी लेकर आने को मजबूर हैं। सीवरेज लाइन तो अभी भी चालू नहीं की है। जिसके कारण खुले में शौच जा रहे हैं। बहुत से आवंटित परिवारों की बजाय यहां पर अन्य लोग ही रह रहे हैं। जिनका कहीं कोई मकान नहीं है। यही हाल बुध विहार में इडब्ल्यूएस मकानों का है। वहां भी अधिकतर खाली पड़े हैं। सड़क, पानी, नाली, सीवरेज की समस्या के कारण कोई रहना पसंद नहीं कर रहे हैं। कुछ परिवार आकर वापस भी लौट चुके हैं। अब पानी व सीवर की लाइनें डाली गई हैं।

दोनों जगहों पर अभी दस प्रतिशत लोग भी खुद के मकानों में नहीं आ आए हैं। जो आए हैं वह भी बहुत मजबूरी में। यहां पर पानी व सीवरेज की सबसे बड़ी समस्या है।

गाडि़या लुहार भी नहीं रह रहे

गाडिय़ा लुहारों के पास कोई मकान नहीं हैं। राजीव आवास योजना के तहत उनको बुध विहार में मकान तो आवंटित कर दिए लेकिन रहने के लिए आवश्यक सुविधाएं अभी तक मुहैया नहीं कराई हैं। जिसके कारण लुहारों के परिवार सड़कों के किनारे ही नजर आते हैं। समय पर सुविधाएं नहीं मिलने के कारण बहुत से लोगों ने एग्रीमेंट पर मकानों का बेचान भी कर दिया।

सरकार का दावा सबको घर

2022 तक सरकार सबको घर देने का दावा कर रही है। जिसके लिए मुख्यमंत्री जन आवास योजना, प्रधानमंत्री जन आवास योजना संचालित हैं। इससे पहले अलग योजनाओं के तहत घर में मिले हैं। पूरा जिला डाक जोन में है। घर में रहने के लिए पानी की जरूरत सबसे पहले है।