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राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) की एनओसी के दम पर थानागाजी के कलसीकलां गुवाड़ा (झिरी) में संचालित खान ओम शुभम हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन को खान एवं भू-विज्ञान विभाग के खनि अभियंता ने बंद करा दिया है। आगामी आदेशों तक इस खान में खनन नहीं होगा। विभाग का कहना है कि इस खान पर मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। खनि अभियंता मनोज शर्मा का कहना है कि उप वन संरक्षक अलवर के अनुसार खनन पट्टे का आंशिक भाग क्षेत्रफल 1876 वर्गमीटर वन भूमि खसरा संख्या 1116 में आता है।
पट्टाधारी ने एनबीडब्ल्यूएल के नियमों की पालना नहीं की। ऐसे में खनन पट्टा में खनन कार्य व खनिज का परिवहन तत्काल प्रभाव से अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है। हालांकि इस कार्रवाई से यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि बिना एनबीडब्ल्यूएल के संचालित खानों पर एक्शन क्यों नहीं लिया गया? इसको लेकर खान विभाग कठघरे में है।
खान संचालक कमलेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने खनि अभियंता व एडिशनल पीसीसीएफ ऑफ फॉरेस्ट एंड चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जयपुर को पत्र भेजकर एकतरफा कार्रवाई पर आपत्ति दायर कराई है। इनका कहना है 1.01 करोड़ रुपए की बाउंड्रीवॉल बनाने के लिए सरिस्का के खाते में जमा कराने के बाद भी बिना मेरा पक्ष सुने यह कार्रवाई की गई है, जो गलत है। प्रतिबंध क्यों लगाया, यह भी नहीं बताया।
सुप्रीम कोर्ट व वन विभाग के मुताबिक सरिस्का से 1 से 10 किमी के बीच खनन कार्य करने के लिए एनबीडब्ल्यूएल की एनओसी जरूरी है, जिसका पालन झिरी एरिया में नहीं हो रहा है। यहां कई खानें बिना एनओसी के ही चल रही हैं। डीएफओ सरिस्का अभिमन्यु सहारण का कहना है कि एक्शन लेने का कार्य खान विभाग का है, हम दूरी का आकलन करते हैं। 1 से 10 किमी के दायरे में खनन के लिए एनबीडब्ल्यूएल की मंजूरी चाहिए।
हमने संबंधित खान पर वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक ही कार्रवाई की है। यदि वन विभाग या सरिस्का अन्य खानों के लिए भी रिपोर्ट देते हैं, तो उसी अनुसार एक्शन लेंगे - मनोज शर्मा, खनि अभियंता
Published on:
27 Feb 2026 11:32 am
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