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वन विभाग के दो डीएफओ के खिलाफ पीएमओ में शिकायत

सरिस्का सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में बिना राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के खानों के संचालन करने व पौधरोपण से लेकर मृदा कार्यों में 18 करोड़ का घोटाला करने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Mar 17, 2026

अलवर. सरिस्का सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में बिना राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के खानों के संचालन करने व पौधरोपण से लेकर मृदा कार्यों में 18 करोड़ का घोटाला करने का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। मामले में एक शिकायतकर्ता ने रजिस्टर्ड पत्र के जरिए शिकायत की थी। इस पर पीएमओ की ओर से कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय को इस संबंध में जांच के निर्देश दिए हैं। इसमें दो डीएफओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। शिकायतकर्ता ने एक करोड़ का चेक भी प्रधानमंत्री सहायता कोष के नाम देकर लिखा है कि यदि शिकायत झूठी मिलें, तो यह एक करोड़ रुपए कोष में जब्त कर लिए जाएं।
18 करोड़ का घोटाला हुआ, एक्शन जरूरी
पौधरोपण के लिए वर्ष 2015-16 से लेकर वर्ष 2024-25 तक मृदा कार्य राजगढ़ में अलवर वन मंडल की ओर से करवाए गए थे। मुख्य वन संरक्षक जयपुर राजीव चतुर्वेदी की जांच में 18 करोड़ का घोटाला पाया गया। अवैध रूप से समितियों का गठन करके यह गबन किया गया। इस मामले में पूर्व डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव व डीएफओ राजेंद्र हुड्डा समेत 15 लोगों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए वन मुख्यालय लिखा और सरकार से एसीबी जांच की सिफारिश की। एक साल से यह जांच दबी हुई है। कार्रवाई न होने के बाद इसे अब प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया है। डीएफओ हुड्डा का कहना था कि जांच प्रक्रियाधीन है। किसी भी प्रकार का कोई गबन नहीं हुआ है।
22 खानों का संचालन कैसे हुआ
इसी तरह सरिस्का सेंचुरी से 1 से 10 किमी के दायरे में बिना राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति के खानों का संचालन नहीं हो सकता। करीब 22 खानों का संचालन झिरी से लेकर टहला में हो रहा है। आरोप हैं कि सरिस्का डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने सेंचुरी से खानों की दूरी का गलत आकलन करके 6 खानों का संचालन करवा दिया। अन्य खानों की दूरी भी संबंधित विभाग को सही नहीं बताई जा रही, जिससे कि उन पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू हो।
पत्रिका ने उठाए थे दोनों मुद्दे
18 करोड़ के घोटाले की जांच रिपोर्ट व 22 खानों के संचालन का मामला राजस्थान पत्रिका ने उठाया, तो तमाम लोगों ने गंभीरता से लिया, लेकिन वन मुख्यालय व खान विभाग नहीं जागा। कार्रवाई नहीं की गई, तो मामले की शिकायत पीएमओ में की गई।