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एक ऐसा अफसर, जिस पर 32 पदों का कार्यभार

तीन जिले, एक अफसर और उन पर 32 पदों का भार। यह कोई फिल्मी का शीर्षक नहीं है। यह हाल राजस्थान आवासन मंडल अलवर का हाल है। मंडल के अंदर तीन जिले आते हैं। तीनों जिलों के अधिकारी अलग-अलग होते हैं। साथ ही संचालन के लिए इंजीनियरों की बड़ी फौज होती है, लेकिन यह सभी पद खाली हैं।

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अलवर

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susheel kumar

Sep 13, 2024

- राजस्थान आवासन मंडल का ये हाल, अलवर, भिवाड़ी व धौलपुर जिले को करता है कवर

- तीनों जिलों के एक्सईएन, 27 एईएन का उप आवासन आयुक्त के पास चार्ज, नक्शे भी खुद बनाते

- रजिस्ट्री से लेकर अन्य कार्य भी अफसर करते, अलवर में कोई इंजीनियर आना नहीं चाहता

AlwarNews : तीन जिले, एक अफसर और उन पर 32 पदों का भार। यह कोई फिल्मी का शीर्षक नहीं है। यह हाल राजस्थान आवासन मंडल अलवर का हाल है। मंडल के अंदर तीन जिले आते हैं। तीनों जिलों के अधिकारी अलग-अलग होते हैं। साथ ही संचालन के लिए इंजीनियरों की बड़ी फौज होती है, लेकिन यह सभी पद खाली हैं। यहां तैनात उप आवासन आयुक्त पीएल मीणा यह सभी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। एक अधिकारी पर 32 पदों का चार्ज होने के कारण 5 साल में एक भी नई योजना लॉंच नहीं की जा सकी। सरकार ने इन वर्षों में एक अधिकारी के जरिए काम तो चला लिया। खजाने में तनख्वाह के पैसे भी बचा लिए, लेकिन उन गरीबों व मध्यम वर्ग का क्या हुआ, जो आवासन मंडल की नई स्कीम के जरिए छत पाने का सपना देख रहे थे।

इन बाधाओं ने रोक दिए योजनाओं के कदम

आवासन मंडल अलवर कार्यालय के अधीन अलवर, भिवाड़ी व धौलपुर जिले आते हैं। जिले में एक्सईएन विभाग का संचालन करता है। तीनों जिलों में कोई एक्सईएन तैनात नहीं है। अलवर में 11, भिवाड़ी व धौलपुर में 8-8 एईएन के पद हैं, सभी खाली हैं। नक्शा बनाने से लेकर रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी भी अलवर में तैनात नहीं हैं। इन सभी पदों का काम उप आवासन आयुक्त के पास है। साथ ही जनता से मिलना व समस्याओं का निस्तारण करने का जिम्मा भी उन्हीं के पास है। आवासन मंडल की ओर से नई योजना पिछले साल लॉंच की जानी थी, लेकिन अधिकारी व इंजीनियर नहीं होने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया।

54 साल में आवासन मंडल की प्रगति

- वर्ष 1970 से लेकर अब तक यानी 54 साल में आवासन मंडल अलवर ने 6 हजार आवास गरीब, मध्यम वर्ग को मुहैया कराए।

- अलवर में एनईबी कॉलोनी बसाई, जिसमें 4 हजार आवास हैं।

- वर्ष 2014- 15 में एनईबी एक्सटेंशन ट्रांसपोर्ट नगर आवासीय योजना लॉंच की गई। यहां फ्लैट एलआईजी, एमआईजी तैयार किए गए। करीब 225 फ्लैट में 23 खाली पड़े हैं।

- 30 बीघा जमीन एनईबी एक्सटेंशन का हिस्सा है, लेकिन कोर्ट केस के कारण यहां आवास नहीं बना जा सके।

मैनपावर न होने से क्या नुकसान

- आवासन मंडल नई योजना लॉंच नहीं कर पा रहा। योजना की डीपीआर बनाने से लेकर धरातल पर उतारने वाले इंजीनियर नहीं।

- ट्रांसपोर्ट नगर में बनाए गए पूरे फ्लैट नहीं बिक पाए। कई पुराने आवास ही कोर्ट केस के जरिए सरेंडर हो रहे।

- सरकार तक सूचनाओं का आदान-प्रदान प्रभावित हो रहा है।

- जनता से संचार पूरा नहीं हो पा रहा। शिकायतों का निस्तारण भी देरी से हो रहा।

- भिवाड़ी व धौलपुर में मुखिया के न होने से योजनाएं नहीं बन पा रही हैं।

पीएल मीणा के जाते ही खाली हो जाएगा विभाग

उप आवासन आयुक्त पीएल मीणा का भी प्रमोशन कभी भी हो सकता है। ऐसे में वह दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाएंगे। उनके जाते ही पूरा मंडल खाली हो जाएगा।

क्या है आवासन मंडल

राज्य की आवासीय समस्या के निराकरण के लिए 24 फरवरी 1970 को राजस्थान आवासन मण्डल एक्ट संख्या-4, वर्ष 1970 के अन्तर्गत राज्य सरकार की ओर से मण्डल की स्थापना की गई थी। वर्तमान में मण्डल का मुख्यालय जयपुर है। इसके अधीन वृत कार्यालय जयपुर, जोधपुर, अलवर, कोटा, उदयपुर व बीकानेर आते हैं।

अलवर, भिवाड़ी, धौलपुर जिले की जिम्मेदारी एक्सईएन निभाते हैं। यह पद खाली हैं। तीनों जिलों में 26 एईएन नहीं हैं। अलवर में नक्शा बनाने से लेकर रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी भी नहीं हैं। सभी के पदभार मेरे पास हैं। मैनपावर बढ़े तभी योजनाएं लॉंच होंगी। सरकार को सूचनाएं हम समय से दे रहे हैं। साथ ही मैनपावर की िस्थति के बारे में भी सरकार को अवगत करा चुके हैं।

-- पीएल मीणा, उप आवासन आयुक्त, अलवर मंडल