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अलवर के इस कॉलेज पर सरकार हर महीने खर्च करती है करोड़ों रुपए, लेकिन विद्यार्थी खेलते हैं लूडो

Arts College Alwar : अलवर के आटर्स कॉलेज में प्रतिमाह करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी पढ़ाई नहीं हो पा रही है।

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अलवर

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Lubhavan Joshi

Aug 09, 2019

Arts College Alwar : No Study In Babu Shobha Ram Arts College Alwar

अलवर के इस कॉलेज पर सरकार हर महीने खर्च करती है करोड़ों रुपए, लेकिन विद्यार्थी खेलते हैं लूडो

अलवर. Arts College Alwar : अलवर जिले के सबसे बड़े कॉलेज कला कॉलेज पर हर माहकरोड़ों रुपए खर्च होते हैं, लेकिन इसके बावजूद शिक्षक पढ़ाने नहीं आ रहे। इस कारण विद्यार्थी कॉलेज आकर लूडो खेल रहे हैं। 94 व्याख्याताओं की संख्या वाले राजकीय कला महाविद्यालय में प्रतिमाह करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यहां अभी तक कक्षाएं शुरू नहीं हुई है।

गुरुवार दोपहर सवा बारह बजे राजकीय कला महाविद्यालय की अधिकांश कक्षाओं में पढ़ाई नहीं चल रही थी। कई शिक्षक छात्रों का इंतजार करते नजर आए। जबकि छात्र खुद ही पढ़ाई से जी चुराते दिख्ेा। यहां कई कमरों में रिपोर्टर ने जाकर देखा तो किसी कमरे में युवाओं का समूह गपशप कर रहा था। एक कमरे में शिक्षिका के आगे ही विद्यार्थी टेबल पर बैठकर बात कर रहे थे। रिपोर्टर ने कमरे में जाकर पूछताछ की तो व्याख्याता कक्षा को छोडकऱ चली गई।
इसी प्रकार एक अन्य कमरे में एक छात्र संगठन के सदस्य चुनाव की तैयारियों को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे थे। एक अन्य कमरे में कुछ लडक़े मोबाइल पर मूवी देखने में मस्त थे। उनका कहना था कि यहां कोई पढ़ाने नहीं आया तो वे मूवी देखने लगे। छात्रों ने बताया कि यहां कुछ व्याख्याता ही कक्षाएं लेते हैं। इसी प्रकार कई कमरों में युवा आपस में गपशप करते हुए मिले। यहां के अधिकतर कक्षाओं में तो पढ़ाई ही नहीं चल रही थी।

कक्षाओं में सफाई तक नहीं

कला महाविद्यालय के अधिकतर कक्षा-कक्षों में फर्नीचर पर इतनी मिट्टी जमी है कि इसे देखकर लगता है कि यहां कई माह से सफाई ही नहीं हुई है। यहां के कमरों में कई जगह तो पहले वाले चुनाव के अवशेष तक पड़े हैं। यहां कई कमरों में फर्नीचर तक टूटा हुआ है, जिनपर बैठकर पढऩा मुश्किल है।

कड़ाई जरूरी

राज्य के अधिकांश सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी होती है, जबकि अलवर के कला कॉलेज में अपेक्षाकृत ठीक स्थिति है। इसके बावजूद पढ़ाई नहीं होना चिंताजनक है। कुछ मेहनती शिक्षक प्रयास भी करते हैं तो छात्र नदारद रहते हैं। इस बीच छात्र संघ चुनावों के हो हल्ले में पढ़ाई गौण हो जाती है। ऐसे में कॉलेज शिक्षा निदेशालय और संबंधित कॉलेज प्रशासन को इस और विशेष ध्यान देना चाहिए। छात्र कक्षाओं की तरफ कैसे आएं? इस पर कार्ययोजना बने। राज्यपाल के उपस्थिति को लेकर स्पष्ट आदेश हैं। नियमों का कड़ाई से पालन कर कक्षाएं लगवाना सुनिश्चित किया जाए तो स्थिति सुधर सकती है।