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बारिश-ओलावृष्टि तो थी कुदरत की देन, अब सरकार बढ़ा रही कर्ज पर ब्याज

धरती पुत्रों का दर्द: एक लाख से ज्यादा किसानों की चौपट हुई रबी की फसल

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अलवर

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mohit bawaliya

May 31, 2023

बारिश-ओलावृष्टि तो थी कुदरत की देन, अब सरकार बढ़ा रही कर्ज पर ब्याज

बारिश-ओलावृष्टि तो थी कुदरत की देन, अब सरकार बढ़ा रही कर्ज पर ब्याज

अलवर. भले ही किसानों को अन्नदाता कहा जाता हो, लेकिन उनकी पीड़ा से सरकारों को सरोकार नहीं है। यही कारण है कि छह माह बीतने के बाद भी फसल खराबे का मुआवजा खातों में नहीं पहुंचा। किसान इंतजार कर रहे हैं। कब मुआवजा आए और कब वह सूदखोरों को ब्याज पर लिए पैसे लौटाएं। मुआवजे में हो रही देरी से किसानों पर कर्ज बढ़ रहा है। ब्याज पर ब्याज लग रहा है। कुछ किसानों का कहना है कि ओले, बारिश तो कुदरत की देन थी। उस सदमे से तो बमुश्किल बाहर निकले, लेकिन सरकारी सिस्टम का सदमा बर्दाश्त नहीं हो रहा। मुआवजा नहीं मिलने से लिए गए कर्ज पर ब्याज बढ़ रहा है। हालांकि प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही किसानों तक मुआवजा पहुंचेगा।
सरसों का 40 हजार हैक्टेयर रकबा : नवंबर 2022 में पाला अधिक पडऩे के कारण रबी की फसल सरसों खराब हो गई। सरसों की फलियों का विकास नहीं हो पाया। दाने भी कमजोर रह गए। इससे किसानों का बड़ा नुकसान हुआ। सरकार ने तय किया कि 33 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए आकलन करने को टीमें खेतों में दौड़ाई गईं। करीब 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबा बाधित हुआ। किसान भी 50 हजार से ज्यादा प्रभावित हुए। उस समय सरकार व जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि मुआवजे के पैसे मिलेंगे पर अब तक हाथ में नहीं आए।
गेहूं का नुकसान उठा चुके 70 हजार से ज्यादा किसान: दूसरा नुकसान गेहूं की फसल कटाई से पहले हो गया। फसल खेतों में खड़ी पक रही थी। उसी दौरान तेज बारिश व ओलो ने फसल चौपट कर दी। करीब 15 दिन किसान बारिश आदि से बेहाल रहे। इसके भी नुकसान का आकलन हुआ। करीब 70 हजार किसान प्रभावित हुआ। प्रभावित रकबा भी किसानों की संख्या के आसपास ही रहा। इसके लिए खुद सरकार ने प्रशासनिक अफसरों को फील्ड में उतारा पर आज तक एक रुपए भी किसानों के हाथों में नहीं आया।

खेती से हो रहा मोहभंग
मिर्जापुर गांव के किसान महेंद्र चौधरी कहते हैं कि सरसों में नुकसान हुआ तो सोचा गेहूं की फसल से लागत निकाल लेंगे। गेहूं को नुकसान हुआ तो उम्मीद दी कि सरकार मुआवजा देगी, लेकिन अब तक एक भी रुपए नहीं मिल पाया। कर्ज पर खेती की। उसका ब्याज बढ़ रहा है। हल्दीना के किसान किशन, भीम ङ्क्षसह की गेहूं की फसल चौपट हो गई। खेती में हुए नुकसान का आकलन हुआ पर भरपाई नहीं हो पाई। कहते हैं कि खरीफ की फसल करने का मन नहीं कर रहा। किसान कब तक टूटता रहेगा। मुआवजा मिल जाता तो कुछ राहत मिल जाती।

सरसों व गेहूं के मुआवजे से संबंधित अभिलेख तहसीलों से मांगे गए हैं। जल्द ही मुआवजा किसानों तक पहुंचेगा।
— उत्तम शेखावत,एडीएम प्रथम, अलवर।