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अलवर का यह ऐतिहासिक कुण्ड हो रहा जर्जर, सीढिय़ों का हाल भी हो गया कुछ ऐसा

अलवर का किशनकुण्ड अलवर की सबसे प्राचीन धरोहरों में से एक है, लेकिन अब यह बेहद ही जर्जर हालत में है।

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अलवर

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Prem Pathak

Apr 09, 2018

BAD CONDITION OF KISHAN KUND IN ALWAR

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किशनकुंड अपने ही विभाग की उपेक्षा का शिकार हो गया है। यहां हुए काम की विभाग की ओर से सही मॉनिटरिंग नहीं होने से काम की पोल अब खुलने लगी है। यहां पर सीढिय़ों के नीचे से बजरी निकलने लगी है। इसके चलते यहां सैर को आने वाले पर्यटक तो घायल हो ही रहे हैं आम आदमी भी यहां पर पैर जमाकर चल रहा है।

यह आ रही है परेशानी

सीढिय़ा लगाते समय उसमें प्रयोग किए जाने वाले बजरी व सीमेंट के मसाले का अनुपात सही नहीं होने की वजह से यह अपनी जगह अच्छी तरह से नहीं पकड़ पाई है। जिसकी वजह से एक एक करके अपनी जगह से हट रही हैं। इससे पर्यटक स्थल के रूप में किशनकुंड की छवि भी खराब हो रही है।। सीढिय़ों के नीचे से निकलने वाली बजरी बारिश में परेशानी पैदा कर सकती है।

24 लाख का हुआ था काम

वर्ष 2014 मेंकेंद्रीय प्रवर्तित योजना के तहत यहां पर 24 .14 लाख रुपए का काम करवाया गया था। यहां पर पहाड़ी चटटानों से बने रास्ते को सही करके यहां पर लाल रंग की बड़ी पटिटयां लगाकर सीढिय़ां बनाई गई थी।

पर्यटक व धार्मिक स्थल है किशनकुंड

अलवर किले के पृष्ठ भाग से जो मार्ग जाता है उस पर लगभग 1 किमी की दूरी पर एक प्राकृतिक कुंड है जिसे कृष्ण कुंड कहते हैं। यह फीट 35 फीट चौडे, 38 फीट लंबे और 25 फीट गहरे कुंड में पानी की आवक तो होती ही है। पहाडिय़ों का अंदरूनी स्रोत भी है जिससे यहां पानी आ जाता है।

यहां पर किशनदास नाम के महाराज रहते थे। जिनका एक स्मारक भी यहां पर बना हुआ है। अलवर के लोगों के लिए यह एक धार्मिक स्थल होने के अलावा पंसदीदा पर्यटक स्थल भी है। यहां बरसात के दौरान बहते हुए झरनों को देखने का अलग ही रोमांच होता है।