
अलवर. अलवर जिले में पर्यटक स्थलों की भरमार है। इनकी खूबसूरती देखने के लिए प्रतिवर्ष देशी-विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। यहां की ऐतिहासिक इमारतें, पुरानी हवेलियां, धार्मिक स्थल, अरावली की पहाडिय़ां सभी पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन पर्यटन स्थलों व ऐतिहासिक स्थलों की देखभाल नहीं होने से इनकी स्थिति बदहाल होती जा रही है। पर्यटक स्थलों व ऐतिहासिक स्मारकों के नाम पर समय-समय पर केंद्र व राज्य सरकार की ओर से करोड़ों रुपए का बजट खर्च करने के बाद भी यहां के हालात जस के तस बने हुए हैं।
राज्य ने भी करवाया काम
राज्य सरकार के कार्यकाल में मत्स्य सर्किट का समय विकास योजना के तहत अलवर व विराटनगर में 393 .05 रुपए का बजट जारी किया गया। इसके अलावा सिलीसेढ़ तिराहे से सिलीसेढ़ तक सडक़ की मरम्मत के लिए भी राज्य योजना के तहत लगभग 28 लाख रुपए का बजट जारी किया गया।
पर्यटक स्थलों की मॉनिटरिंग नहीं
अलवर शहर में जिला प्रशासन के सबसे नजदीक पर्यटक स्थल मूसी महारानी पर लगाई गई लाइटें सालभर से खराब हैं। रात में यहां अंधेरा होने से समाजकंटक घूमते रहते हैं। यहां की दीवारों पर लोगों ने अपने नाम लिख दिए हैं। यहां इतनी गंदगी है कि पर्यटकों का यहां बैठना मुश्किल है। बिजली के खूले तार, टूटी हुई जालियां यहां की बदहाली को बताती हैं।
होपसर्कस के दरवाजे टूटे
शहर के बीचों बीच स्थित होपसर्कस के चारों तरफ लगाए गए दरवाजे टूट गए हैं। इसमें लगाई गई कीमती प्रतिमाएं गंदी हो गई हंै। फव्वारों को चले वर्षों बीत गए हैं। इसके चारों तरफ गंदगी फैली रहती है। सागर के पानी में कचरे के कारण बदबू आती रहती है। सागर की सीढिय़ां टूटी हुई है। यहां से मूसी महारानी की छतरी पर जाने वारा रास्ता पूरी तरह से टूट गया है। ऐसे ही हालात अन्य ऐतिहासिक स्थलों के हैं। किशनकुंड की सीढिय़ां बनने के कुछ समय बाद ही टूट गई।
Published on:
02 Apr 2018 06:32 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
