
सुसाइड नोट और मृतक शिक्षक की फाइल फोटो: पत्रिका
Govt Teacher Committed Suicide: अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के निर्भमपुरा गांव में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने आत्महत्या कर ली। मृतक बड्डन लाल(59) ने रविवार को दोपहर करीब ढाई बजे गांव के बाहर दूसरे प्लॉट पर गाड़ी खड़ी करने के बाद गैराज में फंदा लगाकर जान दे दी। पुलिस को मौके से चार पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें मृतक ने कुछ शिक्षकों और प्रिंसिपल पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं।
मृतक के भतीजे सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि मृतक बड्डन लाल ढहलावास के एक सरकारी स्कूल में एल-1 ग्रेड का शिक्षक था। उनको अधिक कार्यभार सौंप रखा था। इसके अलावा वे बीमार भी चल रहे थे। जून में उनका रिटायरमेंट था। उन्होंने बार-बार अपना चार्ज देने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की।
स्कूल में उनके साथी शिक्षकों ने अलवर में इधर-उधर अपनी ड्यूटी लगवा ली। जिससे वे अकेले रह गए थे। परिजनों का आरोप है कि दो शिक्षक उनको प्रताड़ित करते थे। जिस कारण वे अंदर ही अंदर घुटते रहते थे। इस वजह से उन्होंने आत्महत्या की है। इधर, इस मामले में पुलिस का कहना है कि परिजनों ने इस संबंध में किसी तरह की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है।
मृतक बड्डन लाल के 3 बच्चे हैं। रविवार को दोपहर में उनकी पत्नी गैराज में लकड़ी लेने आई, तो बड्डन लाल का शव फंदे पर लटका मिला। पत्नी की चिल्लाने की आवाज सुनकर गांव वाले मौके पर पहुंचे। सुसाइड नोट के अनुसार वे स्कूल की जिम्मेदारियों के कारण काफी समय से मानसिक तनाव में थे। इसके अलावा बीमारी से परेशान थे। उनका करीब तीन साल से इलाज भी चल रहा था।
सुसाइड नोट में मृतक ने कई आरोप लगाए हैं और ये भी लिखा है कि 'मैं ईश्वर से परमपिता परमात्मा से यही अनुरोध करता हूं कि उन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और शिक्षा विभाग भी इन दोषी लोगों पर कार्रवाई करे, जिन्होंने मुझे आत्महत्या करने को मजबूर किया। यह मेरा अंतिम अनुरोध है। मैं इन सारी परिस्थितियों से जूझकर आत्महत्या करने को मजबूर हुआ हूं।मैं अवकाश भी नहीं ले पा रहा था। प्राथमिक कक्षा को अध्यापन कराने वाला कोई नहीं था। न बच्चों का रिजल्ट बनाने वाला, न कोई मेरी मदद करने वाला, न कोई मेरा चार्ज लेने वाला। मैं रिटायरमेंट के कागज बनवाने के लिए भी छुट्टी नहीं ले पा रहा था। माइंड स्ट्रोक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। कुछ समझ नहीं आ रहा था। मेरे पास चिंतन-मनन करने की भी क्षमता नहीं बची थी। मेरे छोटे भाई मामचंद, बड़े भाई का लड़का सुरेंद्र कुमार, मेरे तीनों बेटे, तीनों पुत्रवधुएं, मेरी प्यारी-सी सभी पोतियां एवं मेरी धर्मपत्नी संतोष देवी को बहुत-बहुत प्यार और मेरा अंतिम प्रणाम। जो मैंने इन परिस्थितियों में कदम उठाया है, मुझे माफ करना। सभी ग्रामवासियों को मेरा अंतिम राम-राम जी।'
Updated on:
09 Feb 2026 08:59 am
Published on:
09 Feb 2026 07:34 am
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