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बहरोड़। दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे (एनएच-48) देश के उन प्रमुख और सबसे महंगे राजमार्गों में शुमार है, जहां हर साल टोल टैक्स का बोझ तो बढ़ा दिया जाता है, लेकिन यात्रियों व वाहन चालकों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। सबसे बड़ी समस्या सार्वजनिक शौचालयों (पब्लिक टॉयलेट) की है। इस हाईवे पर टोल प्लाजा को छोड़ दिया जाए, तो रास्ते में कहीं भी यात्रियों के लिए सार्वजनिक शौचालय नहीं है। न ही विश्राम स्थल हैं।
भारी-भरकम टोल चुकाने के बावजूद यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक शौचालय न होने के कारण वाहन चालकों को मजबूरन होटल या ढाबे पर गाड़ी रोकनी पड़ती है। कई बार बिना कोई सामान खरीदे इन निजी होटलों के वॉशरूम का इस्तेमाल करने पर यात्रियों को होटल संचालकों की असहज नजरों या बदसलूकी का भी सामना करना पड़ता है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए गुरुग्राम से अजमेर तक हाईवे पर 15 विभिन्न स्थानों पर आधुनिक शौचालयों और जन-सुविधाओं का निर्माण किया जाना था, लेकिन यह योजना केवल घोषणाओं और सरकारी फाइलों तक ही सीमित रह गई।
एक तरफ सरकार 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत देश को खुले में शौच मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं देश की राजधानी को जोड़ने वाले इस प्रमुख हाईवे पर हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। यह स्थिति सरकार के स्वच्छता अभियान की पोल खोलने के लिए काफी है।
टोल वसूलने वाली कंपनियां और एनएचएआइ के जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या से वाकिफ होने के बावजूद आंखें मूंदे बैठे हैं। यात्रियों का कहना है कि जब वे मोटा टोल टैक्स चुका रहे हैं, तो उन्हें सम्मानजनक बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। रुकी हुई योजना को तुरंत प्रभाव से चालू कर हाईवे पर जगह-जगह शौचालयों का निर्माण करवाया जाना चाहिए।
हाईवे पर महंगे टोल के साथ सुविधाएं मिलनी चाहिए। एनएचएआइ के जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान दें और सुविधाएं उपलब्ध करवाएं, जिससे यात्रियों को परेशानी नहीं हो।
विक्रम यादव, निवर्तमान उप सभापति, नगर परिषद बहरोड़
Published on:
29 Mar 2026 05:31 pm
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