
अलवर. परशुराम कला मंदिर समिति की ओर से भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर वैज्ञानिक युग में भजनों की प्रासंगिकता विषय पर विचार संवाद कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भजनों के माध्यम से भी प्रभु को पाया जा सकता है। संस्था के अध्यक्ष राधेमोहन शर्मा ने इस अवसर पर सभी वक्ताओं का स्वागत करते हुए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। विषय प्रवर्तन अरविंद पाराशर ने किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रभु को पाने के कई मार्ग हैं जिसमें संगीत व भजन भी एक माध्यम है। गुरुनानक जी ने संगीत व भजनों के माध्यम से प्रभु को पाया।
वे हमेशा भजन गाते हुए सीधे प्रभु से जुड़ जाते थे। इस अवसर पर विनोद शर्मा ने कहा कि भजन के साथ तप भी आवश्यक है। जीवन में त्याग व तप आवश्यक है। ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि भजन भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग है जिस पर चलकर भक्ति काल में संतों ने प्रभु को पाया और हमें नई दिशा दी। कवि रमेश उपाध्याय बासुरी ने कहा कि ओउम के उच्चारण से ही हमें मानसिक शांति मिलती है। ऐसा संगीत जिससे मन के तार परमात्मा से जुड़ जाए, वहीं हमें मुक्ति भी दिला सकता है।
कार्यक्रम में योगेश मिश्रा ने कहा कि प्रभु को पाने के लिए हमें जंगल में जाने की आवश्यकता नहीं है। भजनों के माध्यम से भी प्रभु को पाया जा सकता है। व्याख्याता रेणु मिश्रा ने कहा कि वर्तमान मे मानव बहुत तनाव में रहता है ऐसे में भजन ही शांति व सुकून देता है। शिक्षाविद् कमलेश शर्मा का कहना है कि संगीत व भजन ही हमें एकता के सूत्र में भी पिरोता है। इस अवसर पर अनुरिता झा, विनोद शर्मा, सुरेश शर्मा, ब्राह्मण सभा के मोहन स्वरूप भारद्वाज, राधेमोहन शर्मा, प्रमेन्द्र शर्मा, दीपक पंडित, गोपी चंद शर्मा ने विचार व्यक्त किए। संचालन रामावतार पंडित ने किया।
परशुराम जंयती पर की 101 दीपकों से आरती
अलवर. युवा ब्राह्मण सभा परिवार के तत्वावधान में शहर की जवाहर नगर एवं नेहरू नगर कॉलोनी में बुधवार को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया गया। संगठन के अध्यक्ष आकाश मिश्रा ने बताया कि कार्यक्रम में भगवान परशुराम की 101 दीपकों से आरती की गई। इसके बाद भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।
Published on:
20 Apr 2018 03:12 pm
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