
पंजाबी लोकगीत और ढोल नगाड़ों के साथ किया भंगड़ा-गिद्दा नृत्य
अलवर./भिवाड़ी. भिवाड़ी पंजाबी सभा के तत्वावधान में पंजाबी वाटिका में लोहड़ी का त्यौहार परंपरागत तरीके से उत्साहपूर्वक मनाया गया। समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष, बच्चे, बुजुर्गों ने पवित्र अग्नि के चक्कर लगाते हुए रेवड़ी, मूंगफली व फूले अग्नि देवता को समर्पित किए। लोकगीतों पर ढोल और बैंड के साथ भंगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हुए ऋतु परिवर्तन का आनंद उठाया गया।
पंजाबी सभा अध्यक्ष अनिल वाधवा, सचिव डॉ. सागर अरोड़ा और कोषाध्यक्ष प्रमोद कोहली ने बताया कि भिवाड़ी एसपी डॉ. अमनदीपसिंह कपूर, गोविंद चांदना, महेंद्र गोसाई, महिंद्र शेखू, बाबा सुरजीत सिंह, डॉ. अशोक दुआ, गुरमीत सिंह, दिनेश बेदी, डॉ. राजेश, वीरपाल, पोरससिंह, पंकज दुआ, पवन, संजय वाधवा, राजीव नकरा, पंकज टंडन, मनीष बजाज, राकेश बजाज, रोशन मेहंदीरत्ता, हर्ष नागपाल, देवेंद्र नागपाल, कुलदीप सपरा, लव खन्ना, संजीव कंबोज, दीपक दुआ, चंदन चक्रवर्ती, सनी आहूजा व नीरज कालड़ा आदि ने सामूहिक रूप से पवित्र अग्नि को प्रज्वलित किया। अग्नि में रेवड़ी, मूंगफली व फूले का प्रसाद अपित किया परिक्रमा की और सभी को सुखी, स्वास्थ्य और दीर्घायु की शुभकामनाएं दी। नवदंपतियों और नवजात शिशु के माता-पिता,
दादा-दादी एवं नाना-नानी को बधाइयां दी गई।
कार्यक्रम में गुरुजी विजय सेवक और मैडम अर्चना नाकरा ने लोहड़ी त्यौहार का महत्व बताते हुए कहा कि प्यार-मोहब्बत के त्यौहार लोहड़ी में सभी घरों से लकड़ी के टुकड़े लेकर पवित्र अग्नि जलाई जाती है। मुगलों के कुकृत्य और धर्म परिवर्तन से उनको बचाने के लिए दुल्ला भट्टी लोहड़ी के दिन बच्चियों का हिंदू बच्चों से विवाह कराता था। अतिथियों के खाने की व्यवस्था करता था और उन्हें दहेज भी देता था। इसी त्यौहार की गरीमा और खूबसूरती को बनाए रखते हुए पंजाबी वाटिका सेक्टर-वन हाउसिंग बोर्ड भिवाड़ी में लोहड़ी पर्व मनाया गया। कार्यक्रम में खाने-पीने और जलपान की उचित व्यवस्था की गई। पंजाबी वाटिका में रोशनी और गुब्बारों से सजावट की गई।
Published on:
13 Jan 2020 01:48 am
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