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भिवाड़ी : पुलिस का जिला, लेकिन तहसील भी नहीं

शांति भंग के आरोपितों को जमानत के लिए 40 किमी तिजारा ले जाना पड़ता हैराज्य बजट में टिकी रहती है हर बार नजर

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भिवाड़ी : पुलिस का जिला, लेकिन तहसील भी नहीं

भिवाड़ी : पुलिस का जिला, लेकिन तहसील भी नहीं

भिवाड़ी. 'मेरा दर्द ना जाने कोय... जैसी कहावत राज्य के जाने-माने औद्योगिक शहर भिवाड़ी के साथ चरितार्थ हो रही है। अलवर जिले की इस औद्योगिक नगरी को भले ही जिला पुलिस का दर्जा मिल चुका है, लेकिन सबसे ज्यादा पीडि़त पुलिस महकमा ही है, जिसे शांतिभंग जैसे मामूली आरोपितों को पेश करने क लिए करीब ४० किलोमीटर दूर तिजारा तहसीलदार/ उपखण्ड अधिकारी के सामने पेश करने ले जाना पड़ता है।
जिले में 12 एसडीएम, 16 तहसीलदार
चौंकाने वाली बात यह है कि अलवर जिले में १२ एसडीएम व १६ तहसीलदार तैनात हैं, लेकिन दु:खद स्थिति यह है कि इनमें कहीं भी भिवाड़ी का नाम नहीं है। ऐसे में जाति, मूल निवास, आर्थिक आरक्षण व राजस्व आदि मामलों के लिए तिजारा की ओर रुख करना पड़ता है। गौरतलब है कि जिले में अलवर, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, किशनगढ़बास, तिजारा, बहरोड़, थानागाजी, बानसूर, कोटकासिम, कठूमर, मुंडावर व रामगढ़ में एसडीएम कार्यालय हैं। वहीं १६ तहसील क्रमश: अलवर, बहरोड़, गोविंदगढ़, कठूमर, किशनगढ़बास, कोटकासिम, लक्ष्मणगढ़, मुंडावर, राजगढ़, रामगढ़, थानागाजी, तिजारा, नीमराना, रैनी व मालाखेड़ा हैं। वहीं १२ एसडीएम कार्यालय हैं, जिनमें अलवर, राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, किशनगढ़बास, तिजारा, बहरोड़, थानागाजी, बानसूर, कोटकासिम, कठूमर, मुण्डावर व रामगढ़ शामिल हैं।
राष्ट्रीय दिवस समारोह भी तिजारा: दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय दिवस २६ जनवरी व १५ अगस्त जैसे महत्वपूर्ण समारोहों में भागीदारी निभाने के लिए तिजारा उपखण्ड स्तरीय समारोह में शिरकत करनी पड़ती है। इन दिवसों पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले भिवाड़ी के प्रतिभावान विद्यार्थियों व कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र लेने के ४० किलोमीटर जाना पड़ता है। यानि ८० किलोमीटर का सफर आवागमन में पूरा करना पड़ता है।
पाबंद भी खूब हुए
ऐसा नहीं कि पुलिस ने इस्तगासे ही प्रस्तुत किए हों, इनमें आरोपित पाबंद भी काफी हुए हैं। बतौर उदाहरण यूआईटी थाने में इस प्रकार के मामलों में वर्ष २०१७ में ५६२, २०१८ में १२१४ व वर्ष २०१९ में ५०१ जनों को पाबंद किया गया। वहीं चोपानकी थाने में तीन वर्ष में कुल ३०१ लोगों को पाबंद किया।
यह हो जाए तो अच्छा है
बात शांति भंग की नहीं है, ११०, ११६, १२२ सहित अन्य इस्तगासे पर भी पुलिस का तिजारा आवागमन में समय बर्बाद होता है। कभी-कभी तो एक से अधिक मुल्जिमान पकड़े जाने पर उन्हें तहसीलदार अथवा एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत करने पर ज्यादा पुलिसकर्मी भेजने पड़ते हैं, ऐसे में थाने में आवश्यक कार्य प्रभावित होते हैं। यदि राज्य बजट में भिवाड़ी में ही तहसीलदार/एसडीएम कार्यालय खुल जाता है तो काफी अच्छा रहेगा। पुलिस की अनावश्यक भाग-दौड़ बच जाएगी।
- रविंद्र प्रताप सिंह, थानाधिकारी, फूलबाग, भिवाड़ी (अलवर)