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भोमिया बाबा का मेला आयोजित, कुश्ती दंगल में पहलवानों ने दिखाया दम

पिनान (अलवर) क्षेत्र के टोड़ा नागर गांव में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां भोमिया बाबा और हनुमान जी के वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया।

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पिनान (अलवर) क्षेत्र के टोड़ा नागर गांव में आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां भोमिया बाबा और हनुमान जी के वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आयोजित हुए कुश्ती दंगल ने दर्शकों का मन मोह लिया। मेले की शुरुआत देव भजनों और विधिवत हवन-पूजन के साथ हुई, जिसके बाद सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी। इससे पूर्व रविवार को रामचरितमानस का अखंड पाठ भी आयोजित किया गया था, जिससे पूरे गांव का माहौल भक्तिमय बना रहा।

5100 रुपये तक पहुंचा मुकाबला

दोपहर के समय मेला अपने पूरे परवान पर था और चारों ओर अपार जनसमूह नजर आ रहा था। मेले में लगाई गई विविध प्रकार की दुकानें बच्चों और महिलाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। दोपहर 2 बजे से प्रतीक्षित कुश्ती दंगल का शुभारंभ हुआ। दंगल का पहला मुकाबला 51 रुपये की राशि से शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए 5100 रुपये तक पहुँच गया। जैसे-जैसे अखाड़े में पहलवानों ने एक-दूसरे पर दांव-पेंच आजमाने शुरू किए, दर्शकों का रोमांच बढ़ता गया। पहलवानों की हर जोर-आजमाइश पर ग्रामीणों ने तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया।


मुकाबला बराबरी पर समाप्त

मेले का सबसे रोमांचक क्षण अंतिम कुश्ती के दौरान आया, जब नगर के स्थानीय पहलवान धोनी और बरखेड़ा (मालाखेड़ा) के रामवतार के बीच मुकाबला हुआ। दोनों ही पहलवानों ने बेहतरीन तकनीक और ताकत का प्रदर्शन किया, जिसके कारण काफी देर तक चली इस कुश्ती का कोई परिणाम नहीं निकल सका और मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। दंगल के समापन पर मेला कमेटी ने अखाड़े में उतरे सभी विजेता और उपविजेता पहलवानों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया।

पारंपरिक खेलों के प्रति युवाओं का बढ़ता जूनून

इस विशेष अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिनमें विजय दीक्षित, भजनी राम मीणा, जगमोहन मीणा, विश्राम मीणा और दिनेश चंद शर्मा शामिल थे। इनके साथ ही सरपंच प्रीतम कुमार बेरवा, परसादी लाल गुर्जर, भोलू मीणा, गिर्राज मीणा और दयाराम मीणा सहित मेला कमेटी के समस्त कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाएं संभालीं। ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस मेले ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि पारंपरिक खेलों के प्रति युवाओं के जुनून को भी नई ऊर्जा दी।