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Rajasthan Road Safety: राजस्थान में AI मॉडल की एंट्री, अब सड़कों की हाईटेक मैपिंग, खराब निर्माण पर तुरंत होगी कार्रवाई

Alwar Road Safety: सड़क और नालों के निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और बिग डेटा एनालिटिक्स का सहारा लिया जाएगा।

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अलवर

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Anil Prajapat

Apr 03, 2026

Rajasthan Road

फाइल फोटो- पत्रिका

अलवर। सड़क और नालों के निर्माण की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और बिग डेटा एनालिटिक्स का सहारा लिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में शुरू की गई सड़क सुरक्षा की एआइ आधारित पायलट परियोजना के मॉडल पर राजस्थान में भी काम तेज हो गया है। इसी क्रम में अलवर यूआइटी ने शहर की सड़कों और नालों की एआइ मैपिंग कराने का काम शुरू किया है। इस कार्य पर पहले चरण में 10 लाख रुपए खर्च होंगे।

इस नई तकनीक के तहत यूआइटी डिजिटल नक्शे तैयार करवाएगी, जिनमें हर निर्माण कार्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज होगी। इसमें निर्माण की तारीख, लागत, जिम्मेदार एजेंसी और गारंटी अवधि जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी। इसका उद्देश्य निर्माण में गड़बड़ियों पर रोक लगाना और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करना है। इस व्यवस्था से सड़कें बेहतर होने से मार्ग दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी।

यह होगा फायदा

अब तक देखने में आता था कि निर्माण कार्य करने के बाद कार्यदायी संस्थाएं गायब हो जाती थीं और सड़कें एक-दो साल में ही खराब हो जाती थीं। ऐसे में जनता को परेशानी उठानी पड़ती थी और विभागों के पास यह जानकारी भी नहीं होती थी कि निर्माण किस एजेंसी ने किया था। एआइ आधारित डिजिटल मैपिंग के लागू होने के बाद एक क्लिक पर यह पता लगाया जा सकेगा कि सड़क या नाले का निर्माण किसने किया और उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है।

जब्त होगी संबंधित एजेंसी की सुरक्षा राशि

यदि गारंटी अवधि के दौरान कोई निर्माण खराब पाया जाता है, तो संबंधित एजेंसी की सुरक्षा राशि जब्त कर ली जाएगी। इस पहल से न केवल निर्माण कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी। यदि सड़क या नाले का निर्माण कर दिया गया और उस पर बाद में अतिक्रमण हुआ है, तो उसका भी पता एआइ तकनीक से संबंधित विभाग को मिल सकेगा। संबंधित कार्यदायी संस्था भी इसको लेकर विभाग में आपत्ति दर्ज करा सकेगी।

इनका कहना है

सड़कों की एआइ मैपिंग के लिए टेंडर लगाए जाएंगे। इस व्यवस्था से निगरानी बेहतर होगी और मार्ग दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
-अशोक मदान, एक्सईएन, यूआइटी