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पिता ने जो पैसे व्यापार के लिए दिए थे, उन पैसों से भूखे लोगों को खाना खिला कर कर लिया सच्चा सौदा

गुरु नानकदेव का संदेश, कभी किसी का नहीं छीने हक, मेहनत-ईमानदारी की कमाई में से जरूरतमंद की भी करें मदद। सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव का प्रकाशोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया, लंगर में बांटा प्रसाद।

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  गुरु नानकदेव का प्रकाशोत्सव

भिवाड़ी. गुरुद्वारे में अखंड पाठ के दौरान ज्ञानीजन एवं अरदास करते श्रद्धालु ।

भिवाड़ी. भगतसिंह कॉलोनी भिवाड़ी स्थित श्रीगुरुसिंह सभा गुरुद्वारा में सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव का प्रकाशोत्सव मंगलवार को श्रद्धापूर्वक मनाया। यहां विगत दिनों से किए जा रहे अखंड पाठ के समापन पर भोग लगाया एवं कीर्तन दरबार सजाया गया।


कार्यक्रम में रागियों की ओर से कीर्तन दरबार सजाया गया। जिसमें दिल्ली से हरनाम सिंह, भिवाड़ी से सतनाम सिंह, अवतार सिंह, सुरजीत सिंह, गुरपाल सिंह सहित काफी श्रद्धालुओं ने कीर्तन और कथा का आनंद लिया। बाद में सारी संगत ने लंगर में प्रसाद पाया। रात 10 बजे तक लंगर एवं कीर्तन दरबार जारी रहा। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथि बाबा सुरजीत सिंह ने गुरु नानकदेव का संदेश श्रद्धालुओं को सुनाते हुए कहा कि ईश्वर एक है। वह सभी जगह मौजूद हैं। इसलिए सबके साथ प्रेमपूर्वक रहना चाहिए। तनाव मुक्त रहकर अच्छे कर्म निरंतर करते रहना चाहिए। कभी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए, बल्कि मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से जरूरतमंद को भी कुछ न कुछ देते रहना चाहिए। प्रकाशोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में साध संगत मौजूद रही।


गुरुनानक के उपदेश आज भी प्रासंगिक
आशियाना आंगन आरडब्ल्यूएसअध्यक्ष सुधीरसिंह ने गुरुद्वारे में प्रकाश पर्व के अवसर पर कार्यक्रम में शिरकत की। स्मरण करते हुए बताया कि बाल्यावस्था में तीसरी कक्षा में सच्चा सौदा नामक पाठ पढ़ा था, जो कि गुरु नानकदेव के जीवन पर आधारित था। जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। गुरुदेव को युवावस्था में पिता की ओर से व्यापार के लिए पैसे दिए गए। उन्होंने उन पैसों से जरूरतमंदों को भोजन करा दिया। पिता महता कालू के पूछने पर उन्होंने बताया कि जो पैसे उन्होंने व्यापार करने के लिए दिए थे, उन पैसों से उन्होंने भूखे लोगों को खाना खिला कर सच्चा सौदा कर लिया। सचिव डॉ. सागर अरोड़ा ने कहा कि सिख धर्म के पहले गुरु नानकदेव की जयंती को गुरु पर्व और प्रकाश पर्व के रूप में उल्लास के साथ मनाया जाता है। विश्वभर में स्थापित गुरुद्वारों में इस दिन गुरुवाणी, अरदास, कीर्तन, लंगर और सेवाभाव का अनुपम समन्वय दिखाई देता है। गुरु नानक ने विश्व को मानव सेवा, प्रेम, एकता, समानता और भाईचारे का संदेश दिया। उनके उपदेश आज भी प्रासंगिक है। लोगों को मानवसेवा, प्रेम, सद्भाव व सेवाभाव से जीवन जीने के लिए प्रेरित करते है।

जीवन में नेक रास्ते पर चलने की दी सीख
कोटकासिम. कस्बे में मंगलवार को सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव का प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया। साथ ही जीवन में नेक रास्ते पर चलने की सीख दी गई। इस अवसर पर स्थानीय गुरूद्वारे में शबद, साखियां, भजन-कीर्तन और सुकराना कर गुरु नानक देव का जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया। अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने वाले गुरु नानक देव से संबंधित प्रसंगों का महत्व बताया। जीवन में नेक रास्ते पर चलने की सीख दी गई। शबद के शाब्दिक अर्थ पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव से अरदास लगाई। सभी आगंतुकों को गुरु पर्व की शुभकामनाएं दी। सिख समाज की ओर से लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर काफी संख्या में सिख समाज के लोग मौजूद थे।