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राजस्थान के कलाकारों ने सीएम से की नीलगाय हत्या कानून रद्द करने की मांग

अलवर. देश-प्रदेश में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले राजस्थान के हजारों कलाकारों, रंगकर्मियों, सांस्कृतिककर्मियों व संवेदनशील लोगों की तरफ से प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा को एक भावपूर्ण चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी मे उनसे अपील की गई है कि प्रदेश में वन्यप्राणी नीलगायों की हत्या संबंधी जो भी क्रूर प्रावधान है, उन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाएं।
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अलवर

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Jyoti Sharma

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jyoti

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Updated: 14 May 2026, 12:01 PM IST

अलवर. देश-प्रदेश में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले राजस्थान के हजारों कलाकारों, रंगकर्मियों, सांस्कृतिककर्मियों व संवेदनशील लोगों की तरफ से प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा को एक भावपूर्ण चिट्ठी भेजी गई है।

प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा को एक भावपूर्ण चिट्ठी भेजी गई है

अलवर. देश-प्रदेश में अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले राजस्थान के हजारों कलाकारों, रंगकर्मियों, सांस्कृतिककर्मियों व संवेदनशील लोगों की तरफ से प्रदेश के सीएम भजनलाल शर्मा को एक भावपूर्ण चिट्ठी भेजी गई है। इस चिट्ठी मे उनसे अपील की गई है कि प्रदेश में वन्यप्राणी नीलगायों की हत्या संबंधी जो भी क्रूर प्रावधान है, उन्हें तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाएं।

इस संदर्भ में रंगकर्म से जुड़े प्रदेश के बड़े संगठनों में शामिल भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा ने रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट से मु यमंत्री को उनके सचिवालय स्थित सीएमओ ऑफिस को पत्र भेजा है। शर्मा के अनुसार पिछले दिनों समाचार पत्रों में गोवंश की रक्षा बाबत सीएम के विचारोयुक्त समाचार पढऩे को मिले। उसी से प्रेरित होकर मानवीय दृष्टि से यह पत्र सीएम को भेजा गया है।

पत्र में कहा गया है कि राजस्थान में भी सभी वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु कानून बने हुए है, फिर प्रदेश में कथित किसानों की फसल रक्षा के नाम पर वन्यप्राणी नीलगायों की हत्या के अधिकार देने के कानून क्यों? पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब से नीलगायों की हत्या के कानून बने है, तब से किसी भी किसान ने अपनी फसल रक्षा हेतु नीलगाय की हत्या नहीं की लेकिन उनकी आड़ में शिकारी व मांस व्यापारी काफी तादाद में नीलगायों की हत्या कर उसके मांस को बीफ के रूप में देश-विदेश तक भेज रहे है। यह कानून किसानों की फसल रक्षा के नाम पर नीलगायों की हत्या करने वाले मीट माफियाओं का साधन बन गया है।

पत्र के अनुसार अन्य जंगली जीवों के साथ ही नीलगायों को भी जीने का अधिकार है, इसलिए उसे जीवन जीने के संवैधानिक व प्रकृति के अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए। पत्र में मु यमंत्री से इस क्रम में अपनी अहम भूमिका और पहल करने का अनुरोध करते हुए नीलगाय हत्या कानून रद्द करने का अनुरोध किया गया है। जगदीश शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के मु य न्यायाधीशों व राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने हेतु पत्र की प्रतियां भिजवाई जाएंगी।