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अब उच्च शिक्षा की दौड़…पर जीडी कॉलेज की प्राचार्य के पास पांच कॉलेजों की जिम्मेदारी है

कक्षा 12 के रिजल्ट घोषित हो चुके हैं। अब कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। लेकिन अलवर के महाविद्यालयों के हालात खरब हैं। सरकारों ने वाहवाही लूटने के लिए नए कॉलेज तो बना दिए, लेकिन उनमें कोई सुविधाएं नहीं दी। न स्टाफ है तो न ही बच्चों को पढ़ाने के लिए कमरे। हालत यह है कि अलवर के जीडी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मंजू यादव के पास पांच कॉलेजों की जिम्मेदारी है।
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अलवर

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Umesh Sharma

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Updated: 14 May 2026, 11:49 AM IST

gd College

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आरबीएसई के बाद सीबीएसई ने भी 12वीं के तीनों संकाय का रिजल्ट जारी कर दिया है। अब उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन की दौड़ तेज होगी। प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश प्रक्रिया पहले से चल रही है, लेकिन अलवर जिले में उच्च शिक्षा के हालात अच्छे नहीं हैं। जनप्रतिनिधियों को तो शायद यह पता भी नहीं होगा कि अलवर के जीडी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. मंजू यादव के पास पांच कॉलेजों की जिम्मेदारी है। वे जीडी कॉलेज के साथ-साथ राजकीय कन्या महाविद्यालय कठूमर, राजकीय महाविद्यालय कठूमर, राजकीय कन्या महाविद्यालय खेरली और राजकीय कन्या महाविद्यालय अलवर का अतिरिक्त चार्ज भी संभाल रही हैं। इन कॉलेजों में करीब तीन हजार विद्यार्थी हैं। एडमिशन, छात्रवृत्ति समेत अन्य कार्यों के लिए खेरली व कठूमर के विद्यार्थियों को बार-बार अलवर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। चार कॉलेजों में एक भी स्थायी सरकारी कर्मचारी नहीं है। पूरा संचालन विद्या संबल योजना के भरोसे चल रहा है।
एक बाबू के भरोसे हो रहा काम
जीडी कॉलेज में तैनात एक बाबू ही पांच कॉलेजों का प्रशासनिक काम संभाल रहा है। यही कर्मचारी स्कूटी वितरण और उड़ान योजना का काम भी देख रहा है। बढ़ते काम के दबाव के बीच व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
कठूमर कॉलेज में 450 विद्यार्थी, सिर्फ 4 कमरे
राजकीय महाविद्यालय कठूमर में करीब 450 विद्यार्थियों का नामांकन है, लेकिन यह कॉलेज केवल चार कमरों में संचालित हो रहा है। एक कमरा कार्यालय के लिए और तीन कक्षाओं के लिए हैं। इनमें भी दो कमरों के पंखे बंद पड़े हैं। कॉलेज में छात्राओं के लिए शौचालय तक नहीं है। पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। राजकीय कन्या महाविद्यालय खेरलीगंज में पानी के कैंपर मंगवाए जाते हैं। इस कॉलेज में होम साइंस का कोई प्रोफेसर नहीं है।
बंदर काट देते हैं इंटरनेट के तार
जिन स्कूल भवनों में ये कॉलेज चल रहे हैं, वहां इंटरनेट की सुविधा अक्सर बाधित रहती है। कई बार बंदर इंटरनेट केबल तोड़ देते हैं, जिससे छात्रवृत्ति आवेदन और अन्य ऑनलाइन काम अटक जाते हैं। बायोमैट्रिक उपस्थिति व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। तीन कॉलेजों के भवन निर्माण का कार्य जारी है, लेकिन काम की गति धीमी है।