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अलवर में बेटियों के जीवन में कर रहे बदलाव, आप भी जानिए इस खास पहल को

अलवर में बेटियोंं के जीवन में बदलाव लाने के लिए खास पहल की जा रही है।

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अलवर

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Prem Pathak

Feb 23, 2018

campaign to take forward the life of girls

माहवारी शुरू होते ही बेटियां घबरा जाती हैं, उनकी मनोस्थिति को समझने वाला कोई नहीं होता है। ऐसे में घर के सदस्यों को उनकी मदद करनी चाहिए जिससे वो अकेला महसूस ना करें। यह बात डॉ. सुनीता मीणा ने एक प्रयास संस्था की ओर से अलवर के समीप गांव टोडियार में आयोजित नि:शुल्क जांच शिविर में कही। जिले में यह पहला मौका है जब शहर की महिलाएं स्वयं पहल करते हुए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जागरुक करने के लिए घरों से बाहर निकल रही है। संस्था की सदस्य ग्रामीण महिलाओं से मिलकर उनकी परेशानियां जानकार उनकी मदद के लिए आगे आ रही हैं।

अध्यक्ष अरूणा देवड़ा ने बताया कि शहर में रहने वाली महिलाएं व किशोरियां जागरुक है उनके पास टीवी, इंटरनेट और मोबाइल आदि पर जानकारी मिल जाती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं बहुत पीछे हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मंजू अग्रवाल, गायत्री डाटा, आशा मित्तल, शोभा अग्रवाल, मनीषा जैन, कृष्णा अग्रवाल, नेहा अग्रवाल, रश्मि मोर, सुनीता बंका, रिदी देवडा, स्नेहा बंसल, पूनम अरोडा, बबीता मोरे, सुमन मित्तल, सुमन अग्रवाल आदि महिलाएं उपस्थित थी।

स्वच्छता का महत्व बताया

एक प्रयास संस्था की ओर से लगाए गए शिविर में ग्रामीण महिलाओं को शारीरिक स्वच्छता का महत्व बताया गया। इस दौरान महिला डाक्टर डॉ. कुमुद, डॉ. आकृति, डॉ. वीना ने महिलाओं की जांच की। करीब 350 महिलाओं को सेनेटरी पेड नि:शुल्क वितरित किए गए।

बेटियां बेटों से कहीं भी कम नहीं

शिविर में बेटियों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि बेटियां आजकल किसी भी मोर्चे पर बेटों से पीछे नहीं है। अब बेटियां हर क्षेत्र में लडक़ों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने में सक्षम है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो, चाहे चिकित्सा का, बेटियां आजकल हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। आज के समय में बेटियां घरों में बैठने के लिए नहीं बल्कि लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तैयार है।