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सीबीएसई व आरबीएसई की बोर्ड एक्साम्स में इस तरह के प्रश्नों पर रहेगा फोकस

प्रदेश और जिले में सीबीएसई और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) सत्र 2023-24 की दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं के लिए तैयारियां चल रही हैं।

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प्रदेश और जिले में सीबीएसई और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) सत्र 2023-24 की दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं के लिए तैयारियां चल रही हैं। जिला शिक्षा विभाग भी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में जारी आदेश के अनुसार सीबीएसई के मल्टीपल च्वॉइस और योग्यता आधारित प्रश्नों में बढ़ोत्तरी की जाएगी।

वहीं राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दसवीं कक्षा में पहली बार बैंकिंग-फाइनेंस और फूड प्रोसेसिंग की तैयारी करवाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत पेपर पैटर्न में बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को रटने की परम्परा से दूर करना है तथा व्यावसायिक शिक्षा से जोड़कर रोजगार के लिए तैयार करना है।

दसवीं और बारहवीं में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रम: सीबीएसई बोर्ड में विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए स्कूल स्तर पर ही नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है। इसमें कक्षा 10वीं के लिए ऑटोमोटिव, सौंदर्य व स्वास्थ्य, हैल्थ केयर, सूचना प्रोद्योगिकी आईटी, फुटकर बिक्री, टूरिज्म व हॉस्पिटिलिटी, परिधान निर्मित वस्त्र व गृह सज्जा, निजी सुरक्षा, कृषि, प्लंबर, इंश्योरेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स- हार्डवेयर, टेलीकॉम शामिल किए गए हैं। साथ ही बारहवीं के लिए ऑटोमोटिव, हैल्थ केयर, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनैस, आईटी, टूरिज्म व हॉस्पिटिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स- हार्डवेयर, होम फर्निशिंग, प्लंबर, एग्रीकल्चर टेलीकॉम को शामिल किया गया है।

इस प्रकार से रहेगा सीबीएसई परीक्षाओं का नया पेपर पैटर्न

नई शिक्षा नीति के तहत सीबीएसई 10 वीं बोर्ड में मल्टीपल च्वाइस प्रश्नों पर आधारित, एकीकृत प्रश्न- 50 प्रतिशत, प्रतिक्रिया प्रकार के प्रश्न- 20 प्रतिशत, निर्मित प्रतिक्रिया प्रश्न 30 प्रतिशत तथा 12वीं बोर्ड मल्टीपल च्वाइस प्रश्नों पर आधारित, एकीकृत प्रश्न- 40 , प्रतिक्रिया प्रकार के प्रश्न -20 प्रतिशत और निर्मित प्रतिक्रिया प्रश्न- 40 प्रतिशत शामिल किया है।

केन्द्रीय विद्यालय मोती डूंगरी में नई शिक्षा नीति के तहत रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कैंप संचालित हैं। इसमें 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को शामिल गया है। इसमें 40 फीसदी विद्यार्थी विद्यालय के तथा 60 फीसदी विद्यार्थी बाहर के शामिल किए गए हैं। इन विद्यार्थियों को रोजगार के लिए 400 घंटे का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उसके बाद इनको भारत सरकार की ओर से सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जो रोजगार के लिए मान्य होगा। -लेखराम सैनी, प्रधानाचार्य, केन्द्रीय विद्यालय, अलवर