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उत्साह व उमंग के साथ मना होली, धुलंडी और भैयादोज पर्व

सोशल मीडिया पर चलता रहा शुभकामनाओं का दौर  

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अलवर

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Prem Pathak

Mar 03, 2018

Celebrate Holi, Dhulandi and bhai dooj festival with excitement

अलवर. होली का त्यौहार जिले भर में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। तीन दिवसीय इस पर्व की शुरुआत होलिका दहन के साथ हुई। होलिका दहन पर दोपहर में महिलाओं ने होलिका व भक्त प्रहलाद का पूजन किया । होलिका की परिक्रमा लगाई ओर सूत के धागे से भक्त प्रहलाद को रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद शाम को जैसे ही होलिका दहन का समय नजदीक आने लगा सभी लोग गेंहू व चने की बाल लेकर होलिका दहन स्थल पर पहुंचे। भद्रा की समाप्ति पर शुभ मुहुर्त में होलिका दहन किया गया। शहर के अधिकतर चौराहों पर होलिका दहन किया गया। जैसे ही होलिका दहन हुआ सभी ने एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी गई। इसके बाद होली की राख में पापड सेंककर एक दूसरे को खिलाया गया।
होलिका दहन पर शहर में सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त किए गए थे। इसके चलते सभी जगहों पर सुबह से ही पुलिस की टोलियां नजर आई।

होलिका दहन के अगले दिन धुलंडी के दिन लोगों ने रंग बिरंगे रंग और गुलाल के साथ होली खेली । होली पर सांप्रदायिक एकता व सौहार्द के साथ धुलंडी पर्व मनाया गया। शहर के बाजारों में होली के सामान की खूब बिक्री हुई। हर आदमी रंग बिरंगे रंगों से सराबोर दिखाई दिया।बच्चों के लिए टैंक वाली पिचकारी, पिस्तोल वाली पिचकारी सहित अनेक प्रकार की टॉयज वाली पिचकारियां दुकानो ं पर सजी हुई थी। धुलंडी के दिन युवाओं और बच्चों में होली खेलने का उत्साह ज्यादा दिखाई दिया। अधिकतर पार्को, चौराहों पर डीजे लगाकर होली के गीतों पर युवाओं ने नाच गाकर ऐसा धमाल किया कि सभी लोग हेाली की मस्ती में सराबोर हो गए । होली पर गाए जाने वाले फिल्मी गीत --- रंग बरसे भीगे चूनर वाली, चाहे भीगे तेरी चूनरिया, चाहे भीगे चोली , होली खेले रघुवीरा आदि गीत हर तरफ सुनाई दे रहे थे। बच्चों ने घरों की छतों पर चढक़र पिचकारी से रंगों की बौछार की तो ,्र महिलाओं ने भी घर घर जाकर एक दूसरे के गुलाल लगाकर होली मनाई। इसके साथ ही पारंपरिक लोग गीत आज ब्रिज में होली रे रसिया पर भी खूब नाचना गाना हुआ।

होली व धुलंडी के अवसर पर शहर में अनेक संस्थाओं की ओर से होली मिलन समारोह भी आयेाजित किया गया। होली व धुलंडी के बाद भैयादोज का पर्व भी पारंपरिक रूप से मनाया गया। इस दिन बहनों ने भाईयों की मंगल कामना के लिए भाई दोज की कहानी सुनी। बहनों ने भाईयों को तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। इसके बदले भाईयों ने भी बहनों को उपहार दिया। बहनों को जब नगद राशि व उपहार मिले तो उनके चेहरों पर खुशी की चमक आ गई। भैयादोज के चलते सुबह से ही शहर की मिठाई की दुकानेां पर खासी भीड़ दिखाई दी । भैया दोज पर अधिकतर बहनें अपने मायके आई और भाभियों ने भी अपने पीहर जाकर भैया दोज मनाई। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर आने जाने वालों की खासी भीड़ रही।


गंूजने लगे गणगौर के गीत

होली के बाद आने वाला गणगौर का पर्व भी धुलंडी से शुरु हो गया। नवविवाहिताओं ने होलिका दहन की राख में से बिडुकलियां निकालकर उसे पटटे पर विधिवत स्थापित किया और उसकी पूजा की। गणगौर की पूजा १६ दिनों तक की जाएगी। नवविवाहिताओं ने गणगौर के गीत गाए ।