
नागरिकता कानून पर यहां भी लाइव मंच पर रार
अलवर. नागरिकता संशोधन कानून से पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश से आए अल्पसंख्यक शरणार्थियों को देश में नागरिकता मिलेगी। कानून को लेकर देश भर में उठे विरोध के स्वर थम नहीं रहे हैं। कानून पर पत्रिका ने मंगलवार को भाजपा व कांग्रेस के नेताओं सहित मेव पंचायत अलवर के प्रतिनिधियों से बातचीत की। &असल में नागरिक संशोधन विधेयक लाने की जरूरत नहीं थी। इसके पीछे संघ की सोच है। पूरे देश में अशांति फैल गई। तीन देशों के अल्पसंख्यकों को लिया है लेकिन श्रीलंका को नहीं? श्रीलंका में तमिलों के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार उनको क्यों छोडऩा चाहती है। विश्वविद्यालयों में पुलिस की बर्बर कार्रवाई निंदनीय है। पढ़ाई के माहौल को खत्म करने का काम हो रहा है। आरएसएस व हिन्दू महासभा का देश की आजादी में कोई योगदान नहीं रहा। पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा के अनुसार परिणाम नहीं आए तो बंगाल के चुनावों को देखकर यह विधेयक लाए हैं।
अजीत यादव, सचिव,
प्रदेश कांग्रेस कमेटी
&ये कानून संविधान की हत्या है। पहले एनआरसी लेकर आए। असम में 19 लाख लोग सूची से बाहर हो गए। उनमें करीब 13 लाख हिन्दू थे। वहां इसका जमकर विरोध हुआ। फिर भाजपा सरकार ने नया शिगूफा छोड़ा। जम्मू कश्मीर से धारा 370 निष्प्रभावी करने का कोई फायदा नहीं मिला तो यह बिल लेकर आए हैं। धर्म के आधार पर बिल लाना गलत है। केन्द्र सरकार को पता है कि कानून से देश में नफरत फैल रही है। इस आग को ठंडा करने के लिए कानून को वापस लेना एकमात्र रास्ता है। वैसे भी असम में एनआरसी की प्रक्रिया ने दिखा दिया कि नागरिकता बेहद विस्फोटक मुद्दा है।
शेर मोहम्मद, संरक्षक,
जिला मेव पंचायत अलवर
&तीनों देशों में जिन्हें चैन से रहने नहीे दिया गया। वे प्रताडि़त होकर भारत आए। उन्हीं शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए यह बिल लाया गया है। ये घुसपैठिए नहीं हैं। हम किसी मजहब व सम्प्रदाय के खिलाफ नहीं हैं। बांग्लादेश व पाकिस्तान से घुसपैठियों के लिए जगह नहीं है। इसका विरोध भारत के मूल मुसलमान नहीं कर रहे। असामाजिक तत्व आग लगाने का काम कर रहे हंैं। जामिया मिलिया में बाहरी तत्वों का जमावड़ा रहता है। जिसके कारण हिंसक घटनाएं हुई। कानून पूर्वोत्तर ही नहीं सबके लिए सही है। कांग्रेस, कम्युनिस्ट व वामपंथी लोगों को भड़का रहे हैं।
ज्ञानदेव आहूजा,
Published on:
17 Dec 2019 10:46 pm
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