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सरकारी नियमों में उलझ गई जापानी जोन की रौनक

देश में ख्याति नाम अलवर जिले के जापानी की रौनक कोविड-19 की गाइड लाइन ने छीन ली है। यहां हालात यह है कि प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद मात्र पांच उद्योग ही शुरू हो पाए हैं।

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सरकारी नियमों में उलझ गई जापानी जोन की रौनक

सरकारी नियमों में उलझ गई जापानी जोन की रौनक

देश में ख्याति नाम अलवर जिले के जापानी की रौनक कोविड-19 की गाइड लाइन ने छीन ली है। यहां हालात यह है कि प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद मात्र पांच उद्योग ही शुरू हो पाए हैं।

कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी व्यक्ति के अन्य राज्य से आने पर व्यक्ति को 14 दिन क्वारंटीन आवश्यक है। वहीं प्रतिदिन आने जाने के लिए पास नही बनने की दिक्कत ने जापानी जोन की औद्योगिक गतिविधियों पर ही विराम लगा दिया। हालात यह है कि जापानी जोन में 45 बड़ी औद्योगिक इकाइयों में से मात्र पांच ही शुरू हो पाई हैं। इस नीमराणा क्षेत्र में भारतीय जोन के फेज-1 में 123, फेज-2 के 71, औद्योगिक निर्यात संवर्धन पार्क में 169 उद्योगों को मिलाकर कुल 408 उद्योग हैं। वर्तमान में जापानी जोन में मात्र 5 तथा भारतीय जोन में 75 उद्योग की चल पाए हैं।

यह नियम बने परेशानी का सबब-

यहां भी बिहार, उत्तर प्रदेश व पश्चिमी बंगाल के श्रमिकों का दबादबा है जिसके कारण इन उद्योगों को चलाने में परेशानी आ रही है। वहीं दूसरी ओर कोविड-19 की गाइड लाइन के अनुसार यदि कोई अन्य प्रदेश से आता है तो उसे पहले 14 दिन का क्वारंटीन में रहना होगा। इस जोन में काम करने वाले अधिकतर अधिकारी और कर्मचारी हरियाणा के गुरुग्राम, दिल्ली जैसे महानगरों में रहते हैं जिनका यहां आना ही मुश्किल है। इसी प्रकार उद्योगों को चलाने के लिए आने वाले कर्मचारियों का पास बनना भी कम मुश्किल नहीं है जिससे यह परेशानी सामने आई। कोविड-19 के संक्रमण की चपेट में किसी कर्मचारी व अधिकारी के आने पर सरकारी कानून के डर से इन उद्योगों को शुरु करने में प्रबंधक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यहां दूसरी बड़ी समस्या दिल्ली का पूरी तरह बंद होना है। जापानी जोन के अधिकतर फैक्ट्रियों के प्रशासनिक कार्यालय दिल्ली में है जिसके कोरोना संक्रमण की वजह से बंद होने के कारण औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसी प्रकार इन बड़े उद्योगों के नहीं शुरू होने पर इन पर आश्रित छोटे उद्योग भी बंद पड़े हैं। उद्योगों के सामने कच्चे माल की उपलब्धता नहीं होना भी बड़ी समस्या है।

यह है औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों की पीड़ा-

श्रमिकों का अभाव, विशेष प्रयास हो-

बहुत से उद्योग कच्चे माल एवं श्रमिकों के अभाव में नहीं चल पा रहे हैं । ऐसे उद्योगों के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर श्रमिकों एवं कच्चे माल की आपूर्ति को सुचारू करने की मांग की गई है जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके तथा पलायन कर रहे श्रमिकों एवं मजदूरों को यही रोककर उनको पूरी सुविधा दी जा रही हैं। यहां कोविड-19 के नियमों के चलते यह समस्या भी आई है कि दिल्ली और गुरुग्राम से प्रतिदिन कैसे आया जाए। इन उद्योगों को पटरी पर आने में कम से कम एक साल लग जाएगा। सरकार को इस दिशा में विशेष प्रयास करने होंगे, तभी जापानी जोन शुरू हो पाएगा।

-कृष्ण गोपाल कौशिक, महासचिव, नीमराना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

कच्चा माल मिल नहीं रहा, गतिविधियां थमी-

उद्योगों के सामने कच्चे माल की आपूर्ति का अभाव, उत्पादित माल का बड़े व्यापारिक केन्द्रों व दिल्ली के नहीं खुलने के कारण समस्या आ रही है। सब प्रयास कर रहे हैं जिससे जल्द ही सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से कार्य करने लगेंगी। उद्योगों के सामने आ रही समस्याओं के निजात मिल सकेगी। उद्योगों की तो सारी गतिविधियां ही थम गई है जिससे नीमराणा का जापानी जोन तक प्रभावित हो रहा है।

-के.के. शर्मा, अध्यक्ष , नीमराना इंडस्ट्रीज एसोसिएशन।