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कपास बनी किसानों की आर्थिक उन्नति का प्रतीक, बेहतर उपज के साथ दाम भी मिल रहे ठीक

मालाखेड़ा उपखंड क्षेत्र में किसानों ने इस बार 19442 हैक्टेयर भूमि कपास बुवाई की। 6000 रुपए से बढ़कर दाम हुए 8000 रुपए प्रति क्विंटल।

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मालाखेड़ा. कपास की फसल क्षेत्र के किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का प्रतीक बन रही है। इस बार खरीफ की फसल में कपास की पैदावार बंपर होने और उपज का दाम भी सही मिलने से किसान पूर्ण रूप से समृद्धि होकर आर्थिक उन्नति हासिल कर रहा है। गत वर्ष के मुकाबले इस बार कपास का रकबा बुवाई में लगातार बारिश के कारण कम रहा, लेकिन उसके बावजूद खरीफ की इस फसल को बोने वाले किसानों ने जोश बरकरार रखते हुए जुलाई के महीने में बुवाई कर दी थी।

कपास की बुवाई पर 3 महीने की इस फसल से किसानों का खर्चा एक बीघा पर जुताई, बिजाई, निराई, गुड़ाई, कीटनाशक का छिड़काव पर करीब 10000 का हुआ। इस बार मानसून मेहरबान रहने से कपास के खेतों में सिंचाई नहीं करनी पड़ी, जिससे बिजली का बिल की भी बचत किसान को हुई।

वर्तमान में कपास की खेती से किसान नरम और रूई हासिल कर मालामाल हो रहा है। उनके खेतों में लक्ष्मी बरस रही है। अच्छी देखभाल समय-समय पर निराई गुड़ाई करने पर कपास एक बीघा जमीन में कम से कम तीन क्विंटल से से 5 क्विंटल तक का उत्पादन किसान ने लिया है।

कपास की बिक्री

शुरुआती दौर में कपास के दाम 6000 रुपए प्रति क्विंटल रहे। जहां मांग बढ़ने के साथ ही इसके दाम बढ़कर 8000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। जिससे किसानों के घर पर खुशी का माहौल है।

एक बीघा खेती पर लाभ

किसान जगदीश चौधरी, सतीश चौधरी आदि का कहना है कि तीन महीने की इस कपास की खेती में कम से कम 25000 रुपए प्रति बीघा से 35000 रुपए प्रति बीघा की आमदनी हुई है।

किसान को काफी राहत मिली है

उपनिदेशक कृषि विभाग, अलवर पीसी मीणा के अनुसार लगातार बारिश के कारण इस बार कपास का रकबा अलवर जिले में काम रहा है। उत्पादन तथा बाजार भाव सही मिलने से किसान खुश है। इस बार 19442 हैक्टेयर भूमि में कपास नरमा की बिजाई की गई। जहां किसान इसकी उपज लेकर लाभान्वित हुए हैं। इस बार लगातार बारिश से किसान को काफी राहत मिली है।

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