
झोला छाप डॉक्टर ने किया ऐसा काम, मासूम बालिका की गई जान
बानसूर. क्षेत्र के गांव चतरपुरा में रविवार शाम को झोलाछाप चिकित्सक की ओर से एक बालिका के गलत इंजेक्शन लगाने से बालिका की कोटपूतली अस्पताल ले जाते समय रास्तें में मौत हो गई। परिजनों की मांग पर बालिका का कोटपूतली के बीडीएम अस्पताल में मेडीकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस संबंध में बालिका के परिजनों ने बानसूर पुलिस थाने में झोलाछाप चिकित्सक तरुण यादव के खिलाफ रिर्पोट दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कक्षा नवीं में पढऩे वाली बालिका मनीषा रैगर के जुकाम बुखार होने पर बालिका गांव में ही झोलाछाप चिकित्सक को दिखाने गई। जहां झोलाछाप चिकित्सक की ओर से गलत तरीके इंजेक्शन लगाने से बालिका की तबीयत खराब हो गई। झोलाछाप चिकित्सक बालिका को कोटपूतली बीडीएम अस्पताल लेकर गया। जहां रास्ते में बालिका ने दम तोड़ दिया। परिजनों की मांग पर कोटपूतली के बीडीएम अस्पताल में बालिका मेडीकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया है। घटना के बाद से झोलाछाप चिकित्सक की दुकान बंद है व झोलाछाप चिकित्सक फरार है। इस संबंध में ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. श्रीराम शर्मा ने बताया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं जयपुर में टै्रनिंग में गया हुआ हूं। ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन से गांव में स्थित झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
नहीं होती कार्रवाई
जिले के हर गांव व शहर के गली मौहल्लों मेें झोला छाप डॉक्टरों के दवाखानों का अंबार है। एक कमरे की छोटी दुकान जिसमें एक कुर्सी, टेबल,एक लोहे की अलमारी,एक बैड तथा बाहर क्लिनिक का बोर्ड़। ऐसे क्लिनिक गांव में कई मिल जाएगें। हैरान कर देने वाला सच तो यह है कि इन दुकानदारों को अस्पताल के तय मापदण्डों का भी ज्ञान नहीं है। उनको अमल में लाना तो दूर की बात है। लेकिन सस्ती दवा व कम लागत के उपचार के कारण नासमझ लोग इनकी जेब भर अपनी जान जोखिम में डाल रहे है। इन क्लिनिकों पर उपचार के दौरान मरीजों की मौत होने का मामला लगातार सामने आने के बाद भी प्रशासन इन पर कार्रवाई करने से कतराता रहा है। कभी कभार अभियान के बतौर कार्रवाई कर खानापूर्ति कर अभियान की इतिश्री कर लेता है।
Published on:
10 Jul 2018 12:19 pm
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