
अलवर. बहरोड़ स्थित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला।
अलवर. बहरोड़ क्षेत्र के किसानों की ओर से ज्यादा उपज के लिए खेतों में रासायनिक उर्वरकों का जमकर इस्तेमाल करना अब लोगों की सेहत पर भारी पडऩे लगा है। खेतों में बढ़ते हुए रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को लेकर कृषि अधिकारी चिंतित दिख रहे हंै।
बहरोड़ कृषि अधिकारी ने बताया कि क्षेत्र में किसान फसलों में तय मात्रा से अधिक रासायनिक उर्वरक डाल रहे हंै, जिससे जमीन की उर्वरता कम हो रही है तथा धीरे धीरे उपजाऊ जमीन बंजर होती जा रही है। वर्तमान में खेतों की मिट्टी में आयरन, जिंक तथा आर्गेनिक कार्बन व अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी आ गई है। ऐसे में किसानों को जैविक खेती पर अपना फोकस करना होगा।
यह है प्रमुख कारण
कृषि अधिकारी ने खेतों में घटती हुई उर्वरता को लेकर बताया कि आज किसान खेत में फसल की बुवाई करने से पहले कृषि विभाग के कार्यालय में आकर मिट्टी व पानी की जांच नहीं करवाता है। क्योंकि आज खुले व बरसाती पानी की जगह पर ट्यूबवैल के पानी खेतों में फसलों की सिंचाई हो रही है।
ऐसे में पानी में मौजूद खाद, नमक व फ्लोराइड पर्याप्त मात्रा में जमीन के अंदर पहुंच कर जमीन की उर्वरता शक्ति को बढ़ाने वाला तत्वों को खत्म कर रहे हंै।
किसानों को खेतों की उर्वरता शक्ति बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कृषि अधिकारी से मिट्टी व पानी की जांच करा कर ही करना चाहिए, जिससे खेतों की उर्वरता शक्ति खत्म नहीं हो। अगर किसान प्रचुर मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करता है तो इसका असर कृषि भूमि के साथ ही मानव स्वास्थ्य पर भी नहीं पड़ेगा तथा किसान अनावश्यक रूप से उर्वरकों में खर्च करने वाली भारी भरकम राशि से बच सकता है।
गोबर खाद का
उपयोग कम: समय के साथ ही आज खेतों में गोबर खाद की जगह रासायनिक उर्वरकों ने ले ली है। आज ग्रामीण परिवेश में घटते हुए पशुओं के कारण भी किसान खेतों में पर्याप्त मात्रा में गोबर खाद नहीं डाल पाता है। ऐसे में खेतों में गोबर खाद से बनने वाले रासायनिक पदार्थों की कमी हो गई है। किसान कम लागत व समय में अधिक उत्पादन लेना चाहता है, लेकिन वह अपने खेतों की भूमि को बंजर बनाता जा रहा है।
गोबर खाद का उपयोग अधिक मात्रा में करें
किसान रासायनिक उर्वरकों की जगह पर जैविक खाद व गोबर खाद का उपयोग अधिक मात्रा में करें तो खेतों की उर्वरता शक्ति को बचाया जा सकता है तथा किसानों के लिए कृषि विभाग द्वारा परम्परागत कृषि विकास योजना संचालित की जा रही है, जिसमें कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, गोबर व जैविक खाद के उपयोग को लेकर जानकारी देते हैं।
डॉ. कुलदीप कुमार, कृषि विशेषज्ञ बहरोड़
Published on:
07 Dec 2019 03:14 am
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