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गोबर के दीपक बन रहे आय का साधन, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही है दीपक

चित्तौड़गढ़ की गौशाला से मिली प्रेरणा, अब अलवर को रोशन करने की बारी अलवर. दीपावली पर दीपक जलाने से ही पर्व का अहसास होता है। लेकिन इस बार अलवर की दीपावली कुछ खास होने वाली है, दीपावली पर जलाने के लिए मिटटी के दीपकों के साथ साथ गाय के गोबर के दीपक भी बनाए जा रहे हैं।

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अलवर

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Jyoti Sharma

Oct 12, 2022

गोबर के दीपक बन रहे आय का साधन, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही है दीपक

गोबर के दीपक बन रहे आय का साधन, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही है दीपक

अलवर जिले के तिजारा में मौनी ाबाबा गौशाला में राजीविका मिशन के महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं प्रतिदिन 2 हजार गाय के गोबर के दीपक तैयार कर रही हैं। अभी तक 40 हजार दीपक तैयार किए जा चुके हैं। गोबर से बनाएं ये दीपक प्रतिदिन होने वाली हवन पूजा के लिए भी उपयोगी हैं।

शास्त्रीय परंपरा के अनुसार प्रत्येक पर्व और उत्सव गो वंश अथवा उनके उत्पाद के बिना पूर्ण नहीं होता है। दीपावली के बाद गोवर्धन पर गाय के गोबर से तैयार गोवर्धन की पूजा होती है अब दीपक भी गाय के गोबर के ही जलाएं जाएंगे । इससे वातावरण शुद्ध होगा और गाय के गोबर का उपयोग होगा और गौ माता की उपयोगिता भी साबित होगी।

तिजारा के प्रधान जे पी यादव ने बताया की मोनी बाबा गौशाला, तिजारा में यह प्रयोग पंडित विष्णु दत्त शर्मा सचिव कृषि उपज मंडी नोहर एवं राजीविका मिशन के राहुल महलावत के सहयोग से प्रारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि पंडित विष्णु दत्त शर्मा गाय के गोबर से अनेक उत्पाद बनाने के लिए जाने जाते हैं। इस अवसर पर चित्तौड़गढ़ स्थित निलिया महादेव गौशाला में गोबर के दीपक बनाकर चित्तौड़गढ़ किले पर 1,00,000 दीपक दीपावली पर जलवाए, वहीं गत वर्ष 1008 गांवों में चारभुजा नाथ के मंदिर में गोबर के दीपक जलवाए। अब अलवर में यह पहल की जा रही है।

कैसे बनते हैं दीपक

दीपक बनाने के लिए कच्चे गोबर में 20 प्रतिशत काली मिट्टी मिलाकर एवं 10 प्रतिशत चूना पत्थर मिलाकर हाइड्रोलिक प्रेस से 1 दिन में उच्च गुणवत्ता के 5000 से अधिक दीपक बन जाते हैं। जिन की मजबूती बहुत अच्छी होती है। प्रेस मशीन पर दीपक बनाने के लिए दो या तीन श्रमिक की आवश्यकता होती है। इस प्रकार लगभग शून्य लागत की सामग्री से केवल मेहनत के खर्चे में गोबर के दीपक तैयार हो जाते हैं । इसको तैयार होने में मात्र दो दिन का समय लगेगा। इसके साथ ही गौशाला में गाय के गोबर से बिलूकडियां,देवताओं की तस्वीर आदि भी मशीन से तैयार की जाती है।