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नट सम्राट नाटक को देखकर दर्शक रो पड़े

मत्स्य थिएटर फेस्टिवल के अंतर्गत तीसरे दिन प्रताप ऑडिटोरियम में ‘नट सम्राट’ नाटक का मंचन किया गया, इसे देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई

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अलवर

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Prem Pathak

Mar 29, 2018

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रंग संस्कार थियेटर ग्रुप एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से मत्स्य थिएटर फेस्टिवल के अंतर्गत तीसरे दिन प्रताप ऑडिटोरियम में ‘नट सम्राट’ नाटक का मंचन किया गया, इसे देखकर दर्शकों ने खूब तालियां बजाई और वे भाव विभोर हो गए।


आंखें, कांटे जैसी अनेक फिल्मों में आर्ट डायरेक्टर के रूप में काम कर चुके जयंत देशमुख की ओर से निर्देशित नाटक ‘नट सम्राट’ एक नाटककार की कहानी है जिसके 100 से अधिक शो हो चुके हैं। नट सम्राट की प्रमुख भूमिका अदा करने वाले आलोक चटर्जी ने अपने बेहतरीन अभिनय से लोगों को तालियां बजाने के लिए के साथ ही आंसू बहाने के लिए मजबूर कर दिया।

आलोक चटर्जी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक हैं जो अनेक सीरियलों एवं नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। नट सम्राट नाटक में अन्य कलाकारों में कावेरी बेलवलकर की भूमिका में रश्मि मजूमदार, नदंन की भूमिका में सुनील गायकवाड, शारदा की भूमिका में ज्योति दुबे, सुधाकर की भूमिका में राहुल तिवारी, नलिनी की भूमिका में अंजली सिंह, सुहासिनी की भूमिका में एंजेल चंदनानी, विठोबा की भूमिका में जैकी भावसार, महादेव की कमी गौरव सराठे, कलवंकर की भूमिका में हरीश वर्मा, मिसेज कलवंकर की भूमिका में रश्मि आचार्य तथा राजा की भूमिका में अंश पयान सिन्हा ने अभिनीत की।नाटक के अंत में राष्ट्रीय नाटक विद्यालय दिल्ली से आए दौलत वैध ने जयंत देशमुख एवं उनकी पूरी टीम को प्रतीक चिन्ह देकर उनका सम्मान किया।अलवर में शानदार आडिटोरियम, यहां है रंगकर्म की सम्भावना-नट सम्राट नाटक के निर्देशक जयंत देशमुख ने कहा कि अलवर शहर में इतना खूबसूरत ऑडिटोरियम होना एक बहुत बड़ी बात है। नट सम्राट नाटक एक नाटककार की कहानी को बयां करता है और वह कहानी सीधे-सीधे परिवार से और समाज से जुड़ती है। एक नाटक कार के जीवन में एवं उसके जुड़े हुए परिवार के जीवन में किस तरह की समस्याएं आती हैं। यहां के नाटक प्रेमियों में जो उत्साहदिखाई देता है, उतना अन्य जगह कम होता है। यदि इस ऑडिटोरियम की किराया कम हो जाए तो मुम्बई और दिल्ली से बेहतर रंगकर्म अलवर में होना प्रारम्भ हो जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रदीप कुमार ने सभी दर्शकों का अभिनंदन किया। संचालन वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश शर्मा ने किया। इस महोत्सव को सफल बनाने में विश्वनाथ मीणा, अखिलेश, हितेश कुमार जैमन, संजय सैनी, विनीत भारती, अविनाश सिंह, राजेश महिवाल, नीलम ठाकुर तथा राजीव वर्मा की सक्रिय भूमिका रही। संयोजन देशराज मीणा ने किया।