
बनकर तैयार दूध में घी की मात्रा दिखाता युवक ,दूध तैयार करता युवक
गोविन्दगढ. जिस दूध का आमजन की ओर से उपयोग किया जा रहा है, वह धीमा जहर साबित होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि परचून की आड में जिले में कई स्थानों पर नकली दूध बनाने का सामान बेचा जा रहा है। आश्चर्य तो यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग सहित अन्य विभाग को नकली दूध बनने की फैक्ट्रियों की जानकारी नहीं है और थोड़े से लालच में मिलावटिया आम जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
नकली दूध माफिया महज 5500 रुपए में नकली दूध तैयार कर बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। यहां तक कि यह दूध सरस की डेयरी तक भी पहुंच रहा है। हालांकि खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नकली दूध, मिठाई और पनीर आदि के सेंपल लेने की कार्रवाई की है, लेकिन कोई भी प्रभावी साबित नहीं हुई। जिले में अधिकांश जगह खुद सरस डेयरी के अध्यक्ष की ओर से कार्रवाई की गई। कुछ समय के लिए इन अवैध दूध के कारोबार पर रोक लगी, लेकिन उसके बाद फिर यह कार्य आसानी से चालू हो गया और नकली दूध और उससे बनने वाले उत्पाद धीमा जहर साबित हो रहा है।आरोप है कि जिले सहित ग्रामीण क्षेत्र में परचून की दुकान पर पाउडर के नाम से दूध में मिलाने वाला पाउडर मिलता है। कुछ डेरियों पर केमिकल गिरोह को उपलब्ध करवाया जाता है। दूध बनाने वाले युवक ने बताया कि दूध को डेयरी में पहुंचाने के लिए पर कैन का 200 से 500 का खर्चा लगता है। जिसे आसानी से उसे पहुंचा दिया जाता है।
ऐसे बनाते है नकली दूध
नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि 16 किलो पाउडर 500 ग्राम ऑयल लेना होता है। जिसे एक पीपा में गर्म कर बॉस्को का ग्राइंडर लेकर उसमें तैयार किया जाता है। फिर 4 कैन दूध यानी 200 लीटर तैयार दूध 5500 रुपए में तैयार होता है। अगर हम बात ओरिजिनल दूध की बात करे तो वह 1 लीटर दूध 50 से 55 रुपए तक मिलता है। सरस डेयरी चेयरमैन की ओर से काफी सख्ती के बावजूद नकली दूध को पहुंचा ही देते हैं।
मिल रही धमकियां
सरस डेयरी में मिलावटी दूध नहीं पहुंच रहा है। मिलावटी दूध को हमने नष्ट किया है। अब तक 40000 लीटर दूध नष्ट कर 30 लाख की पेलंटी हमने लगाई है। 10 सोसायटियों को बंद किया है। दूध माफिया के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर मुझे धमकियां भी दी जा रही हैं। पूरा जिला ही नहीं, राजस्थान में इतनी कार्रवाई किसी के द्वारा नहीं की गई।
विश्राम गुर्जर, चेयरमैन सरस डेयरी अलवर।
नहीं है प्रभावी कानून
रामगढ़, मालाखेड़ा, तिजारा, अलवर शहर सहित कई स्थानों पर दूध के सेंपल नहीं है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। एडीएम सिटी के यहां पर इनकी सुनवाई होती है। प्रभावी कानून नहीं होने के कारण से बच निकलते हैं।
श्रीराम शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अलवर।
Published on:
27 Mar 2023 06:39 pm
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