अच्छी सेहत के लिए मॉर्निंग वॉक को जरूरी बताया गया है। चिकित्सक भी अब तक डायबिटीज के मरीजों को नियमित 5 किलो मीटर नियमित मॉनिंग वॉक की सलाह दे रहे थे। इसके साथ ही अस्थमा, श्वसन रोग व फेफड़े संबंधी बीमारियों के मरीजों के लिए भी मार्निंग वॉक को रामबाण माना गया है। वहीं, अब वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढऩे के कारण मरीज व वृद्धजनों को सूर्याेदय के बाद मॉर्निंग वॉक पर जाने की सलाह दी जा रही है।
विशेषज्ञ बता रहे यह है कारण
प्रदूषण का स्तर सर्दी के साथ बढ़ता जा रहा है। अलवर शहर में शनिवार को प्रदूषण का स्तर 261 रहा। जानकारी के अनुसार सर्दियों में रात्रि के समय व अल सुबह अधिक धुंध रहती है। इसका कारण वायु में मौजूद धूल के कण व प्रदूषण है। इससे अल सुबह घूमने जाने वाले श्वसन संबंधी बीमारियों से पीडि़त मरीजों को अस्थमा का अटैक सहित अन्य बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, सूर्योदय के बाद तापमान में बढ़ोतरी के साथ प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आती है। ऐसे में अस्थमा, श्वसन संबंधी एवं फेफड़ों से संबंधित बीमारियों से पीडि़त मरीज और वृृद्धजनों को सूर्याेदय के बाद मॉर्निंग वॉक पर जाने एवं रात्रि के समय जल्दी घर जाने की सलाह दी जा रही है।
मरीजों की अभी यह स्थिति
आंकड़ों के अनुसार अस्थमा व श्वसन संबंधी बीमारियों से पीडि़त करीब 60 से 70 मरीज प्रतिदिन सामान्य अस्पताल की ओपीडी में उपचार के लिए आ रहे हैं। इसके साथ ही ऑक्सीजन के स्तर में कमी वाले करीब 20 से 25 मरीज प्रतिदिन अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण के स्तर में और बढ़ोतरी होने पर आगामी दिनों में मरीजों की संख्या भी बढ़ सकती है।
इनका कहना
प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण अल सुबह घूमने जाना अस्थमा, श्वसन व फैफड़े संबंधी बीमारियों से पीडि़त मरीज और वृद्धजनों के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे में मरीज व वृद्धजन सूर्याेदय के बाद घूमने जाएं तो बेहतर होगा।
डॉ. सुनील चौहान, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, सामान्य अस्पताल।