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Behror News: बहरोड़। शहरी क्षेत्र में शामिल की गई 12 ग्राम पंचायतों में से 11 पंचायतों के भवन पिछले एक साल से बंद पड़े हैं। लाखों रुपए की लागत से बने इन भवनों के मुख्य द्वारों पर ताले लटक रहे हैं और इनके रखरखाव की जिम्मेदारी होने के बावजूद नगरपरिषद की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही। उपयोग के अभाव में ये भवन अब खस्ताहाल होने लगे हैं।
करीब एक वर्ष पूर्व बहरोड़ की 12 ग्राम पंचायतों को नगर परिषद क्षेत्र में शामिल किया गया था। इसके बाद से ही अधिकांश पंचायत भवनों का उपयोग बंद हो गया। साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी नगरपरिषद के पास है, लेकिन अब तक इन भवनों की सुध नहीं ली गई। परिणामस्वरूप ये भवन समाजकंटक का अड्डा बनते जा रहे हैं।
शहरी क्षेत्र में शामिल होते ही पंचायत भवन अनुपयोगी हो गए। नगरपरिषद और पंचायतीराज विभाग इनमें से किसी का भी प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, शहर में कई सरकारी विभाग ऐसे हैं जिनके पास स्वयं के भवन नहीं हैं और वे किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। हर माह हजारों रुपए किराए पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बंद पड़े पंचायत भवनों में कार्यालय शिफ्ट करने को लेकर संबंधित विभागों ने अब तक कोई रुचि नहीं दिखाई।
कांकरदोपा, शेरपुर, जागुवास, गूंती, हमींदपुर, खरखड़ा, खोहरी, नांगलखोड़िया, रामसिंहपुरा और रिवाली ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन बने हुए हैं, जिन पर ताले लटके हुए हैं। दहमी ग्राम पंचायत का भवन पूर्व में निर्मित नहीं हो पाया था।
राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर मिनी सचिवालय की तर्ज पर 20 से 25 लाख रुपए की लागत से भवनों का निर्माण कराया था। इनमें विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। नगरपरिषद के अधीन आने के बाद इन भवनों का उपयोग केवल शिविरों के आयोजन तक सीमित रह गया है।
परिषद क्षेत्र में शामिल हुई ग्राम पंचायतों के भवनों के उपयोग के लिए योजना बनाई जा रही है। यहां जल्द ही परिषद स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी, ताकि संबंधित वार्डों के लोगों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हो सके।
फोटो बहरोड़. कांकरदोपा ग्राम पंचायत का भवन जिस पर लटके रहते हैं ताले ।
Published on:
02 Mar 2026 04:12 pm
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