
होम वोटिंग : बुजुर्ग महिलाएं मायके गईं...पुरुषों की आंखें नहीं कर पा रही काम
वोटिंग कराने गई टीमों के आ रहे पसीने, बुजुर्गों को समझाना मुश्किल
- तमाम बुजुर्ग वोटरों की आंखें खराब, बैलेट पेपर पर टिक या निशान लगाना आसान नहीं
- कुछ परिवार ऐसे आए जिन्होंने यही दुविधा बुजुर्गों की बताई, कुछ बुजुर्ग घरों से हैं बाहर
निर्वाचन विभाग की ओर से होम वोटिंग की प्रक्रिया तीसरे दिन भी जारी रही। करीब 1500 लोगों ने अब तक वोट दिए हैं। वोटिंग के लिए घर-घर पहुंच रही टीमों को मतदान करवाने के लिए पसीने आ रहे हैं। बुजुर्ग लोगों की आंखें पूरी तरह काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में कुछ जगहों पर बुजुर्गों ने इनकार किया। हालांकि दूसरे दिन जाकर टीमों ने वोटिंग करवाई।
यही नहीं कई बुजुर्गों के परिवारीजन बोल रहे हैं कि वह आज वोटिंग नहीं करवा पाएंगे। उसका कारण यही बता रहे हैं कि उनके घर के बुजुर्ग बाहर चले गए या फिर महिला बुजुर्ग मायके आदि गई हैं। टीम को बार-बार वहां जाना पड़ रहा है। बताते हैं कि बुजुर्गों को समझाकर बीएलओ वोट डलवा रहे हैं। तीन दिन से चल रही होम वोटिंग की प्रक्रिया 21 नवंबर तक चलेगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर दिक्कतें आई हैं लेकिन दूसरे दिन टीम पहुंचकर वोट डलवा रही हैं। कोशिश है कि शत-प्रतिशत मतदान हो।
तीसरे दिन 345 ने की होम वोटिंग
तीसरे दिन होम वोटिंग में 345 मतदाताओं ने हिस्सा लिया। किशनगढबास में 80 वर्ष से अधिक आयु केे 23 लोगों ने, दिव्यांग श्रेणी के 14 विशेष योग्यजन, मुण्डावर में 23 वरिष्ठ नागरिक, 11 विशेष योग्यजन, बहरोड़ में 142 में से 16 वरिष्ठ नागरिक, 7 विशेष योग्यजन, बानसूर में 17 वरिष्ठ नागरिक, 9 विशेष योग्यजन, थानागाजी में 46 वरिष्ठ नागरिक, 28 विशेष योग्यजन, अलवर ग्रामीण में 17 वरिष्ठ नागरिक, 14 विशेष योग्यजन, रामगढ में 38 वरिष्ठ नागरिक, 10 विशेष योग्यजन, राजगढ-लक्ष्मणगढ में 170 में से 50 वरिष्ठ नागरिक, 22 विशेष योग्यजनों ने मतदान किया।
Published on:
17 Nov 2023 10:37 am
