
किसान का अंगूठा खोल रहा फर्जीवाड़े की पोल
अलवर.
किसानों का अंगूठा ही उनके नाम से फसली ऋण में किए गए फर्जीवाड़े की पोल खोल रहा हैं। पिछले छह माह में दो बार सरकारों ने सहकारी बैंकों को ऋण माफ किया है। ऋण माफी के बाद किसानों का बायोमैट्रिक सत्यापन कराना अनिवार्य किया तो फसली ऋण में हुआ फर्जीवाड़ा किसानों के जरिए सामने आने लगा है। जैसे-जैसे किसानों के फसली ऋण की माफी के बाद उनके अंगूठा पहचान से सत्यापन होने लगा वैसे-वैसे फर्जकारी की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। शिकायतकर्ता ज्यादातर किसान यही कह रहे हैं कि उनके नाम से दूसरों ने ऋण उठाए हैं। जिले भर में अब तक ऐसी कई दर्जन शिकायत अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं।
सबसे पहले बहरोड़ में
सबसे पहले बहरोड़ कस्बे में कई को-ऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े किसानों ने शिकायत की थी कि उनके नाम की कर्जमाफी की सूचियां चस्पा हुई हैं। जबकि उनको फसली ऋण ही नहीं मिला। जांच करने पर यहां बड़ी गड़बड़ी मिली। वित्तीय अनियमितताएं भी सामने आई। जिसकी अभी तक जांच चल रही है।
रैणी में बड़ी शिकायत मिली
रैणी पंचायत समिति के डेरा गांव के ग्रामीणों ने बैंक व प्रशासन के अधिकारियों को लिखित में शिकायत दी है कि सहकारी बैंक व समिति के अधिकारी व पदाधिकारियों ने आपस में मिलीभगत करके उनके नाम के फसली ऋण उठाए हैं। जबकि असलियत में उन्होंने ऋण ही नहीं लिया। अब कर्ज माफी होने के बाद उनको अंगूठा निशान के लिए बुलाया जा रहा है।
ये शिकायतकर्ता : रैणी के डेरा गांव की समिति के किसान रामदयाल शर्मा के नाम से 60 हजार 354 रुपए माफ किया गया है। जबकि असलियत में किसान का कहना है कि फसली ऋण उनको मिला ही नहीं। जिसकी शिकायत उपखण्ड अधिकारी से की है।
इसी तरह डेरा के जंगली राम सैनी का कहना है कि उसके नाम पर 22 हजार 354 रुपया फसली ऋण माफ किया गया है। जबकि फसली ऋण का पैसा ही नहीं मिला। अब बायोमैट्रिक सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है।
इसी प्रकार मुण्डावर के ग्राम पंचायत खानपुर के किसान बलवीर का कहना है कि कई साल पहले उनके नाम से ऋण दूसरों ने उठा लिया। अब उनको बार-बार बैंक से यह कहकर बुलाया जा रहा है कि आप बायोमैट्रिक सत्यापन करके जाएं। तकि ऋण का पैसे कब किसे दिया। कुछ नहीं बताया जा रहा है।
शिकायतों की जांच करा रहे
बहरोड़ सहित कुछ जगहों से शिकायत मिली थी। इसकी जांच कराई जा रही है। जहां गड़बड़ी मिलेगी उन जगहों पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
बीके वर्मा, प्रबंध निदेशक, दी अलवर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक अलवर
Published on:
10 Mar 2019 10:05 pm
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