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लाल सोना कहे जाने वाली प्याज की खेती की तैयारी में जुट रहे किसान….. देखे वीडियो

अलवर जिले की लाल सोना कहे जाने वाली प्याज की खेती की तैयारी में किसान जुट गए हैं। खेतों में प्याज के बीज तैयार करने के लिए परिवार सहित किसानों को जुटे देखा जा सकता है। इस दौरान कण की बिजाई की जा रही है। अन्नदाता पूरे परिवार के साथ खेतों में मेहनत करते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो अलवर जिले के किसान पूरे वर्ष भर तक प्याज की खेती में ही लगे रहते हैं। खेतों में जनवरी व फरवरी में पहले कण की बुवाई कर बीज तैयार करते हैं।

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अकबर. अलवर जिले की लाल सोना कहे जाने वाली प्याज की खेती की तैयारी में किसान जुट गए हैं। खेतों में प्याज के बीज तैयार करने के लिए परिवार सहित किसानों को जुटे देखा जा सकता है। इस दौरान कण की बिजाई की जा रही है।

अन्नदाता पूरे परिवार के साथ खेतों में मेहनत करते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो अलवर जिले के किसान पूरे वर्ष भर तक प्याज की खेती में ही लगे रहते हैं। खेतों में जनवरी व फरवरी में पहले कण की बुवाई कर बीज तैयार करते हैं। यह कण गंठी बीज के रूप में 3 महीने में तैयार हो जाता है। उसके बाद 3 महीने बरसात के दिनों में इनको घरों में मचान बनाकर रखा जाता है। क्योंकि बरसात व उमस से बचाने के लिए उनकी सुरक्षा में लगे रहते हैं। उसके बाद अगस्त, सितंबर माह में प्याज की खेती की जाती है। जिसमें 3 महीने तक यह खेती तैयार होकर फिर दीपावली के आसपास पैदावारी मंडी ले जाई जाती है।

अच्छे भाव की रहती है उम्मीद

किसानों का कहना है कि अच्छे भाव की उम्मीद के सहारे ही प्याज की खेती करते हैं। जिसमें महंगे भाव में कण खरीदते हैं और फिर इसकी बिजाई कर रहे हैं। यह तीन महीने में तैयार हो जाते हैं। गंठी के रूप में यह बीज तैयार हो जाता है और इसे फिर खेतों में लगा देते हैं। किसानों के अनुसार उन्हें उम्मीद रहती है कि फसल के अच्छे भाव मिलेंगे। जहां यह खेती मोटी लागत लगाकर की जाती है और प्याज के कण भी महंगे भाव के होते हैं।

खेत की जुताई भी बेहतर जरूरी

किसानों के अनुसार खेरों को अच्छी तरह जुताई कर लेते हैं। नीराई-गुडाई कर इसमें देशी-खाद भी मिलाते हैं और क्यारिया बनाकर की बुवाई करते हैं। समय-समय पर पानी और नीराई-गुड़ाई करनी पड़ती है। जब जाकर तैयार होता है।